तुर्की के ऐतिहासिक जनमत संग्रह में राष्ट्रपति एर्दोगन की जीत

राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने इस्तांबुल में एक रैली को संबोधित करते हुए जनमत संग्रह में जीत का दावा किया और कहा कि उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल हुई है। परिणाम राष्ट्रपति एर्दोगन के पक्ष में आने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्रियों, डिग्री जारी करने, वरिष्ठ न्यायाधीशों के चुनाव और संसद को बर्खास्त करने के विस्तृत विकल्प प्राप्त होंगे। देश की दो बड़ी विपक्षी दलों ने जनमत संग्रह के परिणाम को चुनौती देने के लिए कहा है। विपक्ष की बड़ी पार्टी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी ने 60 प्रतिशत वोटों की दोबारा गिनती की मांग की है।

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन को देश में होने वाले जनमत संग्रह में सफलता मिल गई है जिसके बाद अब उन्हें व्यापक राष्ट्रपति विकल्प प्राप्त होंगे और वह 2029 तक सत्ता में रह सकते हैं।

इस्तांबुल में जनमत संग्रह से पहले अंतिम रैली को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने अपने समर्थकों को बताया था कि नए संविधान से देश में स्थिरता और विश्वास आएगा जो देश के विकास की जरूरत है।तुर्क संसद ने जनवरी में संविधान के अनुच्छेद 18 को मंजूरी दी थी लेकिन इस अवसर पर संसद में हाथापाई भी देखने को मिली।तुर्की में पिछले साल देश में असफल तख्तापलट के बाद होने वाले दमन पर चिंता व्यक्त किया जा रहा है, लेकिन राष्ट्रपति के समर्थकों का कहना है कि देश की स्थिरता के लिए परिवर्तन आवश्यक हैं। नई सुधार के तहत देश के प्रधानमंत्री पद वर्तमान प्रधानमंत्री बिन अली यलदरम के बजाय किसी और व्यक्ति के पास जाएगा या फिर इस पद की जगह उपाध्यक्ष लेंगे।

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गौरतलब है कि राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन देश के संसदीय प्रणाली को कार्यकारी अध्यक्ष पद से बदलना चाहते हैं। तुर्की के सरकारी मीडिया में दिखाए जाने वाले दृश्यों में राष्ट्रपति भवन के बाहर जश्न मनाने के लिए एकत्र होने वाले हजारों लोगों को देखा जा सकता है। जनमत के लिए 1,67,000 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे जहां साढ़े पांच करोड़ मतदाताओं ने अपना मताधिकार का इस्तेमाल किया। तुर्की के राष्ट्रपति का कहना था कि देश को दरपेश सुरक्षा चुनौतियों का पद बुरा होने के लिए परिवर्तन की जरूरत है।

 

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