रोहिंग्यायों को बंगाल की खाड़ी स्थित द्वीप पर पहुंचाना शुरू किया, नही माना बांग्लादेश

बांग्लादेश (Bangladesh) प्रशासन ने मानवाधिकार संगठनों के आग्रह को दरकिनार करते हुए हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों को एक अलग-थलग द्वीप पर पहुंचाना शुरू कर दिया है. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि बंगाल की खाड़ी (Bay Of Bengal) में स्थित द्वीप पर स्थानांतरित करने को लेकर शरणार्थियों को ‘स्वतंत्र एवं सुविचारित निर्णय’ लेने की अनुमति दी जानी चाहिए. द्वीप पर करीब 100,000लोगों के रहने के लिए सुविधाएं विकसित की गयी हैं. यह आंकड़ा उन लाखों मुस्लिम रोहिंग्याओं का महज एक छोटा सा अंश है जो अपने मूल स्थान म्यामांर में हिंसक उत्पीड़न से बचने के लिए भाग गये और भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. एक अधिकारी ने पहचान नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि बृहस्पतिवार को शरणार्थियों को लेकर 11 बसें कॉक्स बाजार जिले से द्वीप के लिए रवाना हुईं जिसके रात तक में पहुंचने की संभावना है.

उन्होंने बताया कि कुछ हजार शरणार्थी पहले जत्थे में थे. वैसे कॉक्स बाजार के अधिकारी ने यह नहीं बताया कि द्वीप पर पहुंचाये जाने के लिए शरणार्थियों को चुना गया. अगस्त, 2017 के बाद करीब 700,000 रोहिंग्या भागकर कॉक्स बाजार के शिविरों में पहुंचे थे. उसी दौरान बौद्ध बहुल म्यामांर ने उग्रवादियों के हमले के बाद मुस्लिम संगठन पर कठोर कार्रवाई शुरू की थी. इस कार्रवाई के दौरान बलात्कार एवं हत्याएं की गयीं और हजारों घर जला दिये गये.

वैश्विक अधिकारवादी संगठनों एवं संयुक्त राष्ट्र ने इसे जातीय सफाया करार दिया. विदेशी मीडिया को भी इस द्वीप जिसे बाशन चार कहा जा रहा है, पर जाने नहीं दिया गया. कभी यह द्वीप मानसून के दौरान नियमित रूप से डूब जाता था लेकिन अब वहां बाढ़ सुरक्षा तटबंध, मकान, अस्पताल, मस्जिदें आदि हैं. यह द्वीप मुख्य भूमि से 21 मील दूर है.

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जब 2015 में पहली बार शरणार्थियों को इस द्वीप पर पहुंचाने का प्रस्ताव रखा गया था, तब से अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां और संयुक्त राष्ट्र ने इसका विरोध किया है क्योंकि उन्हें डर है कि बड़े तूफान से हजारों लोगो की जान खतरे में पड़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को एक बयान में कहा कि उसे शरणार्थियों को पहुंचाने, इस वास्ते उनके चयन आदि की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया.

प्रधानमंत्री शेख हसीना बार बार संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से कह चुकी हैं कि उनका प्रशासन शरणार्थियों को अन्यत्र ले जाने का निर्णय लेने से पहले उनसे संपर्क करेगा और किसी भी शरणार्थी के साथ इसके लिए जबर्दस्ती नहीं की जाएगी.  

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