इस मुस्लिम देश में है श्रीहरि की सबसे बड़ी मूर्ति, यहां लोगों के दिल में बसते हैं श्रीराम

नई दिल्ली। हमारे देश में हिंदू देवी देवताओं के बहुत से प्राचीन और नए मंदिर मौजूद हैं। पड़ोसी देश नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान में भी हिंदू धार्मिक महत्व के बहुत सारे स्थल मौजूद हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे आराध्य भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत नहीं बल्कि एक मुस्लिम देश में स्थित हैं। करीब 800 करोड़ रूपये की लागत से बनी भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति इंडोनेशिया में हैं। इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प हैं। इस्लामिक राष्ट्र इंडोनेशिया के बाली शहर में गरूड़ व विष्णु के 393 फुट ऊँची प्रतिमा स्थापित है। आप जानकर चौंक जाएंगे कि इसे बनाने में 25 साल का समय लगा है। यह विश्व का दूसरा सबसे ऊँचा धार्मिक प्रतीक है। 393 फ़ीट ऊँची ये मूर्ति स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से 90 फ़ीट ऊँची है। दुनिया में सबसे ऊँची मूर्ति चीन में है। भगवान बुद्ध की ये मूर्ति 420 फ़ीट ऊँची है।

दरअसल, 1979 में इंडोनेशिया के मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता ने एक स्वप्न देखा था। मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता इंडोनेशिया में हिन्दू प्रतीक की विशालकाय मूर्ति बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कम्पनी स्थापित की। मूर्ति की डिजाइन पर अथक परिश्रम किया। धन जुटाने के लिए देश और दुनिया की यात्रा की। मूर्ति तांबे और पीतल की बनाई जानी थी इसलिए धन की बहुत आवश्यकता थी। साल 1994 में मूर्ति बनाने का काम शुरू हुआ। कई बार धन की कमी के कारण काम बीच-बीच में महीनों रुका रहता लेकिन न्यूमन की इच्छाशक्ति बड़ी प्रबल थी। वे नहीं रुके। लगभग एक दशक बाद दुनिया न्यूमन और उनके इस स्वप्न को बिसरा चुकी थी। यह मूर्ति 2018 में बनकर तैयार हुई।

भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करने के पीछे विचार ये था कि इंडोनेशिया के सबसे प्राचीन धर्म और संस्कृति को वहां के शिल्प में ढाला जाए। इंडोनेशिया में यूँ तो बुद्धिज्म और इस्लाम धर्म के अनुयायी भी रहते हैं लेकिन हिन्दू धर्म तो प्राचीन काल से यहाँ प्रचलित रहा है। जिस बाली द्वीप में इस मूर्ति को स्थापित किया गया, वहां की 83 प्रतिशत जनसँख्या हिन्दू धर्म का पालन कर रही है। इस मूर्ति को लेकर वहां की सरकार बहुत उत्साहित है। गरुड़ विष्णु केनकाना मूर्ति को इंडोनेशिया सरकार ने देश की प्रतिनिधि कृति का दर्जा दे दिया है।

गरुड़ विष्णु केनकाना कल्चरल पार्क में इस मूर्ति को स्थापित किया गया है। इस पर पिछले पच्चीस साल में लगभग सौ मिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। पहले गरुड़ की मूर्ति बनाई गई। मूर्ति के ऊपर विष्णु को विराजित करने के लिए एक आसन बनाया गया। साठ मीटर चौड़े इस आसन पर विष्णु विराजमान हैं। लिबर्टी की मूर्ति के मुकाबले ये मूर्ति अधिक चौड़ी है। गरुड़ के पंख ही साठ मीटर के बनाए गए हैं। इसे इस तरह बनाया गया है कि अगले सौ साल में भी इसकी चमक और मजबूती बरक़रार रह सके। इसके अलावा एक ‘विंड टनल टेस्ट’ भी करवाया गया। इससे पता चला कि तूफानी हवाओं को ये मूर्ति झेल सकेगी या नहीं। मूर्ति बनाने के लिए चार हज़ार टन तांबा, पीतल और स्टील का उपयोग किया गया है। इसे मजबूती देने के लिए कांक्रीट की परत लगाई गई है। मूर्ति जावा में तैयार की गई और उसे एक हज़ार किमी दूर ट्रकों पर लादकर ले जाया गया था।

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मूर्तिकार को भारत सरकार ने ‘पद्मश्री’ से नवाज़ा

मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता को उनके इस महान कार्य के लिए भले ही विश्व के किसी और देश ने नहीं सराहा हो लेकिन भारत ने उनके 25 साल के परिश्रम के लिए उनका सम्मान किया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बप्पा न्यूमन नुआर्ता को गरिमामयी सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाज़ा गया।

इंडोनेशिया के दिल में बसे हैं श्रीराम
मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्थित हजारों द्वीपों पर फैला इंडोनेशिया मुस्लिम देश है।
करीब 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर भगवान श्रीराम और रामायण की गहरी छाप है। इंडोनेशिया में लोग बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण का पढ़ते हैं। रामायण इंडोनेशिया की स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।

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