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सर्वे : इस्लामाबाद में मदरसों की हुई भरमार, लेकिन स्कूल कोई नहीं खुला

दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ धार्मिक मदरसे ही खुल रहे हैं। सर्वे में कहा गया कि राजधानी के जी -13 और जी -14 के नए आवासीय क्षेत्रों में कोई पब्लिक स्कूल नहीं है लेकिन कई मदरसे काम कर रहे हैं। फेडरल डायरेक्टोरेट ऑफ एजुकेशन एफडीई के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि पिछले कई साल से हम कोई नया स्कूल नहीं खोल सके हैं। आईसीटी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2013 के बाद से राजधानी के विभिन्न हिस्सों में कई नए मदरसे स्थापित किए गए हैं।

पिछले चार साल के दौरान संघीय सरकार ने इस्लामाबाद में कोई नया स्कूल नहीं खोला है लेकिन राजधानी में कई मदरसे शुरू हुए हैं। एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक राजधानी में मदरसों की संख्या 374 है और इनमें से अधिकांश अपंजीकृत हैं। प्रशासन द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चला है कि सरकार के पास सेमिनरी के अधिकांश हिस्सों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि धार्मिक संस्थानों का 205 पंजीकरण रद्द नहीं किया गया था।

पूर्व में देश में मदरसों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान ने एक नए अध्यादेश को मंजूरी दी थी। इसके तहत इनधार्मिक स्कूलों को सरकार से पंजीकरण कराना होगा। साथ ही कहा था कि जो मदरसे सरकार से पंजीकृत नहीं होंगे उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी और सरकारी सहायता से भी वंचित कर दिया जाएगा।

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इस्लामाबाद में चार विचारधाराओं से जुड़े मदरसों में देवबंदी सूची में सबसे ऊपर है, इसके बाद बरेलवी, अहले-ए-हदीस और शिया को सूची में शीर्ष स्थान दिया था। एक सूत्र ने बताया कि बोर्डिंग सुविधाओं वाले 374 मदरसों में 25,000 से अधिक छात्र पढ़ रहे थे जिसमें लगभग 12,000 छात्र इस्लामाबाद के और शेष अन्य शहरों और कस्बों से थे। यह सर्वेक्षण देश के आतंकवादी गतिविधियों की हालिया पहल के बाद आंतरिक रूप से गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान के निर्देश पर किया गया था। सर्वेक्षण दो चरणों में किया जा रहा है जिसमें पहले चरण में इनकी स्थिति की पुष्टि की जाँच की गई है कि क्या वे पंजीकृत थे या नहीं।

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