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भविष्य पुराण के मुताबिक सांपों से जुड़े 15 रहस्य

हमारे प्राचीन ग्रंथों में से एक भविष्य पुराण में सांपो से जुडी कई आश्चर्यजनक बातें बताई गई है. आज हम अपने पाठकों को भविष्य पुराण में दर्ज वो सब बातें  बता रहे है.

  • भविष्य पुराण में बताया गया है कि नागों के प्रजनन का समय ज्येष्ठ और आषाढ़ मास होता है. इन दिनों नाग मैथुन करते हैं. यानी यह महीना सांपों के गर्भ धारण का समय है.
  • वर्षा ऋतु के चार महीने तक सार्पिनी गर्भ धारण करती है और कार्तिक के महीने में सर्पिनी प्रसव करती है यानी अंडे देती है.
  • गर्भवती नागिन एक बार में दो सौ चालीस अंडे देती है.
  • नाग अपने अंडों को स्वयं खा जाता है. ईश्वरीय कृपा से जो अंडे बच जाते हैं उनसे नागों का वंश आगे बढ़ता है.
  • सोने के समान आभा वाले अंडे से नाग का जन्म होता है.
  • लंबी रेखाओं से युक्त अंडों से नागिन उत्पन्न होती है.
  • पुराण के अनुसार नागों में भी नपुंसक पैदा होते हैं. इनके बारे में बताया गया है कि ललिमा युक्त अंडे से जन्म लेने वाले नाग नपुंसक होते हैं.
  • अंडे से बाहर आने के केवल सात दिन बाद संपोलों का रंग काला हो जाता है.
  • अंडे से बाहर आने के 21 दिन बाद नाग के विषदंत आ जाते हैं और 25 दिन बाद नागों में किसी के प्राण छीनने की क्षमता आ जाती है.
  • नाग दीर्घायु होते हैं. अगर यह अकाल मृत्यु से बच जाए तो यह 120 वर्ष तक जीवित रह सकते है.
  • जो सांप समय से पहले जन्म ले लेते हैं उनका विष मंद होता है और उनकी आयु भी कम होती है.
  • मनुष्य की तरह सांप के भी बत्तीस दांत होते हैं. इनके चार विषैले दाढ़ होते हैं जिनके नाम हैं मकरी, कराली, कालरात्री और यमदूती.
  • सांप जब किसी को काटकर पूरा विष उगल देता है तब पेट के बल उलट जाता है. इस प्रकार से सांप जिसे काट लेता है उसका जीवित बचना बड़ा कठिन होता है.
  • सांप के दो सौ चालीस सूक्ष्म पैर होते हैं इसलिए दिखाई नहीं देते. चलते समय यह पैर बाहर निकल आते हैं अन्य समय शरीर में प्रविष्ट कर जाते हैं.
  • भविष्य पुराण के अनुसार सर्प के काटने से जिनकी मृत्यु होती है वह वह अधोगति को प्राप्त करते हैं और अगले जनम में बिना विष वाले सांप होते हैं.

 

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