बड़ों के पैर छूने से दूर होता है दुर्भाग्य, जानें फायदे

नई दिल्ली। हमारी सनातन संस्कृति में बड़े-बुजुर्गों और योग्य व्यक्तिओं के चरणस्पर्श करने की प्राचीन परम्परा है। शास्त्रों के अनुसार वयोवृद्ध जन के चरण स्पर्श से हमारे पुण्य में वृद्धि होती है और उनके शुभाशीर्वाद से हमारा दुर्भाग्य दूर हो जाता है। बड़ों का चरण स्पर्श अथवा प्रणाम एक परम्परा या विधान नहीं है, अपितु यह एक विज्ञान है, जो हमारे मनोदैहिक तथा वैचारिक विकास से जुड़ा है।

माना जाता है कि पैर छूने से हमारे मन में अच्छे संस्कारों का उदय होता है तथा नई पुरानी पीढ़ी के बीच स्वस्थ सकारात्मक संवाद की स्थापना होती है। चरण स्पर्श, प्रणाम-निवेदन करना अभिवादन भारतीय सनातन शिष्टाचार का महत्वपूर्ण अंग है, यह एक जीवन संस्कार है।
प्रणाम-निवेदन में नम्रता, विनयशील, श्रद्धा, सेवा, आदर एवं पूज्यता का भाव सन्निहित रहता है। अभिवादन से आयु, विद्या, यश, एवं बल की वृद्धि होती है। भारतीय परम्परा में प्रात: जागरण से शयन पर्यन्त प्रणाम की अविछिन्न परम्परा प्रवाहमान रहती है।

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बड़े बुजुर्गों का चरण स्पर्श तीन प्रकार से किया जाता है- (1) झुक कर, (1) घुटनों के बल बैठ कर (3) साष्टांग प्रणाम कर। इनसे जो आध्यात्मिक लाभ होता है, वह तो है ही, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी प्रणाम की प्रक्रिया अत्यन्त लाभदायक है।

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