सिजेरियन डिलीवरी कराने जा रही हैं जो जान लें ये बातें

नई दिल्ली। महिलाओं के मन में सिजेरियन से मां बनने को लेकर कई कंफ्यूजन होती है। महिलाओं को लगता है कि सिजेरियन डिलेवरी से आगे चलकर कई तरह के हेल्थ इश्यू हो सकते हैं। आज हम आपको सीजेरियन डिलीवरी से जुड़ी कुछ अहम बातें बताएंगे, जिससे कई भ्रांतियों से पर्दा उठ जाएगा।

डिलेवरी के समय दर्द होता ही है, चाहे वह सिजेरियन हो या फिर नॉर्मल डिलीवरी। बस एनेस्थेसिया देने की वजह से ऑपरेशन करते समय दर्द नहीं होता। जैसे-जैसे एनेस्थेसिया का असर कम होता है। दर्द अपने आप बढ़ता जाता है। ऐसे में दोनों ही तरह की डिलीवरी में 10-15 दिनों तक दर्द की स्थिति बनी रहती है।

यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है कि सिजेरियन होने के बाद दूसरा बच्चा कभी नॉर्मल डिलीवरी से नहीं होता। सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कई मेडिकल कंडीशन को देखकर ही फैसला लिया जाता है कि गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी होगी या नॉर्मल।वहीं, बच्चे को जन्म देने की कॉम्पलिकेशन को भी देखा जाता है।

नवजात बच्चे की मां से प्राकृतिक तौर पर बॉन्डिंग मजबूत ही होती है क्योंकि बच्चा मां के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताता है और मां से उसे सबसे ज्यादा केयर मिलती है, ऐसे में बच्चा सिजेरियन से पैदा हो या नॉर्मल डिलीवरी से, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।

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सिजेरियन के बाद ब्रेस्टफीडिंग में होने वाली दिक्कत सबसे बड़ा झूठ है। सिजेरियन के बाद मां की दूध मिलाने की क्षमता या दूध पर कोई असर नहीं पड़ता।सिजेरियन एक प्रक्रिया है, बच्चे को मां के गर्भ से बाहर निकालने की, ऐसे में यह सिजेरियन हो या नॉर्मल डिलीवरी दोनों ही प्रक्रिया में मां कोई सीरियस हेल्थ इश्यू न होने पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा सकती है।

सिजेरियन के बाद मां और बच्चे की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। नॉर्मल या सिजेरियन दोनों ही तरह की डिलीवरी में मां और बच्चे दोनों को प्यार और एक्सट्रा केयर की जरुरत होती है।

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