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पिता ने कसा तंज तो बेटे ने बसाया शहर, नाम पड़ा बीकानेर

नई दिल्ली। राजस्थान का शहर बीकानेर सैंकड़ों साल की सांस्कृतिक विरासत को संभाले हुए है। करीब 532 साल पहले अक्षय द्वितीया को राव बीकाजी द्वारा बसाए गए इस रंगीले शहर की स्थापना की कहानी भी कम रोचक नहीं है। मरहूम शायर अजीज आजाद ने एक बार कहा था ‘मेरा दावा है सब जहर उतर जाएगा, सिर्फ इक बार मेरे शहर में रहकर देखो’ से शेर उस शहर की हकीकत बयां करता है जिसे दुनिया बीकानेर के नाम से जानती है।

राव बीकाजी (1465-1504 ई.) का जन्म 5 अगस्त 1438 ई. को जोधपुर में हुआ था। इनके पिता का नाम राव जोधा व माता रानी नौरंगदे थी। बीकाजी का विवाह करणी माता की उपस्थिति में पूगल के राव शेखा भाटी की पुत्री “रंगकंवर” के साथ हुई थी।

बीकानेर की स्थापना के पीछे की कहानी ये बताई जाती है कि एक दिन जोधपुर नरेश राव जोधा दरबार में बैठे थे तो बीकाजी कुछ देर से आये तथा प्रणाम कर अपने चाचा कांथल से कानाफूसी करने लगे| यह देख कर राव जोधा ने व्यंग्य में कहा “ मालूम होता है कि दोनों चाचा-भतीजा किसी नए राज्य की स्थापना की योजना बना रहे हैं। “ इस पर बीका और कांथल ने कहा कि “यदि महाराज साहब ! आप की कृपा हुई तो जल्दी ही ऐसा ही होगा” और ये कहने के साथ ही साथ चाचा– भतीजा दोनों राजदरबार से उठ के चले आये |

इन्हीं दोनों ने मिल कर नए बीकानेर राज्य की स्थापना की। इस प्रकार एक ताने की प्रतिक्रिया से बीकानेर की स्थापना हुई। वैसे ये क्षेत्र तब भी निर्जन नहीं था इस क्षेत्र में जाटों की बसावट के कई 2 गाँव थे।

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आसोज सुदी 10, संवत 1522, सन 1465 को बीकाजी ने जोधपुर से कूच किया तथा पहले मण्डोर पहुंचे। राव बीका ने दस वर्ष तक भाटियों का मुकाबला किया मगर विजय हासिल न देख संवत 1442 में वर्तमान बीकानेर आ गये। उन्हीं ने 1488 ई.में बीकानेर नगर की स्थापना कर उसे अपनी राजधानी बनाया। बीकाजी ने विक्रम संवत 1542 में वर्तमान लक्ष्मीनाथ मन्दिर के पास, बीकानेर के प्रथम किले की नींव रखी जिसका प्रवेशोत्सव संवत 1545, वैशाख सुदी 2, शनिवार को मनाया गया! आज भी इस किले के अवशेष देखे जा सकते हैं| इस संबंध में एक लोक-दोहा बहुप्रचलित है।।

‘पन्द्रह सौ पैंतालवे, सुद बैसाख सुमेर, थावर बीज थरपियो, बीका बीकानेर ||

इस शहर पर शुरू से ही राजपूत राजाओं की हुकूमत रही लेकिन, उन सब में महाराजा गंगा सिंह का नाम आज भी बड़े आदर के साथ लिया जाता है। महाराजा गंगा सिंह जहां कुशल शासक के रूप में अपनी पहचान रखते थे, वहीं समय से आगे सोचने की योग्यता भी रखते थे। यही कारण था की अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान उनकी पहुंच महारानी विक्टोरिया तक थी और विश्वयुद्ध के दौरान उन्हें ब्रिटिश-भारतीय सेनाओं के कमान्डर-इन-चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई। गंगा सिंह के समय में बीकानेर एक विकसित रियासत था और जो सुविधाएं दूसरी रियासतों ने कभी देखी नहीं थीं, वे भी बीकानेर में आम लोगों को उपलब्ध थीं। बिजली, रेल, हवाई जहाज और टेलीफोन की उपलब्धता करवाने वाली रियासत बीकानेर ही थी। यहां का पीबीएम अस्पताल देश के बेहतरीन अस्पतालों में शुमार होता था।

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