यहां गिरा था माता पार्वती जी का कर्णफूल, जानें रहस्य

नई दिल्ली। हमारे देश के मंदिरों में अनेक रहस्य छिपे हैं। ऐसा ही रहस्यमयी मणिकर्ण तीर्थ हिमाचल प्रदेश में स्थित है। कुल्लू से लगभग 45 किमी दूर पार्वती घाटी में व्यास और पार्वती नदियों के मध्य स्थित मणिकर्ण का अर्थ कान का मणि यानी कर्णफूल से है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार एक बार यहां भ्रमण करते समय मां पार्वती का कर्णफूल कहीं गया था। भगवान भोलेनाथ ने कर्णफूल को ढूंढने का काम किया। कर्णफूल पाताल लोक में जाकर शेषनाग के पास चला गया था, जिसके बाद शिवजी काफी क्रोधित हुए। शेषनाग ने कर्णफूल वापस कर दिया था। माना जाता है कि शेषनाग ने जब जोर से फुंकार भरी तब ऊपर जमीन पर दरार पड़ गई थी, जिसके बाद वहां गर्म पानी के जल स्रोतों का निर्माण हुआ। गर्म पानी के साथ अनमोल रत्न भी प्राप्त हुए।

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इसी स्थान पर भगवान शिव का मंदिर है। कुल्लू के राजाओं ने भगवान राम का एक मंदिर भी बनवाया था जो रघुनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान कृष्ण एवं विष्णु के मंदिर भी हैं। इस स्थान के धार्मिक महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुल्लू घाटी के अधिकतर देवता समय-समय पर अपनी सवारी के साथ यहां आते रहते हैं।

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