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फांसी सुबह सूर्योदय से पहले क्यूँ दी जाती है ? जाने फांसी के नियम, समय और प्रक्रिया

विश्व के अधिकांश देश मृत्युदंड को समाप्त कर चुके हैं तो कुछ इसे समाप्त करने की तैयारी में हैं  भारत समेत विश्व में अब केवल 37 ही ऐसे देश हैं जहाँ पिछले 10 सालों में फांसी दी गई है चीन फांसी पर लटकाने में सबसे आगे है चीन के बाद ईरान का नंबर है यहाँ तो फांसी खुल्ले में दी जाती है और कई बार तो सामूहिक रूप में भी दी जाती है भारत में फांसी जघन्य अपराध पर ही दी जाती है और इस पर भी राजनीति की जाती है  जानिए भारत में फांसी के लिए क्या नियम-कानून हैं

फांसी सुबह सूर्योदय से पहले क्यूँ दी जाती है ?

अक्सर यह सवाल पुछा जाता है की क्यूँ फांसी का समय सूर्योदय से पहले का रखा जाता है इसकी सिर्फ एक ही वजह है जेल के सभी कार्य सूर्योदय के बाद ही शुरू होते हैं इसीलिए फांसी की सजा पहले दे दी जाती है ताकि बाद के कामो पर कोई असर न पड़े

फांसी से पहले आखिरी ख्वाहिश पूछते हैं

जेल के अधिकारी फांसी से पहले सजा पाने वाले से आखिरी ख्वाहिश पूछते हैं जो जेल के अन्दर और जेल मैन्युअल के तहत होता है इसमें वो अपने घरवालो से बात और मिलने, या कोई धार्मिक ग्रन्थ पढने की इच्छा कर सकता है या कोई और इच्छा जताता है जो जेल प्रशासन के मैन्युअल में है तो उसे पूरा किया जाता है.

 

फांसी के वक्त कौन कौन मौजूद रहता है ?

जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, और जल्लाद मौजूद रहते है इनके बिना फांसी नहीं दी जाती

 

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फांसी से पहले जल्लाद मांफी मांगता है

फांसी पर लटकाने से पहले जल्लाद बोलता है मुझे माफ़ करना हिन्दू भाइयों को राम राम, मुसलमान भाइयों को सलाम हम क्या कर सकते हैं हम तो हुकुम के गुलाम हैं

 

फांसी के बाद डॉक्टर मरने की पुष्टि करता है

फांसी पर लटकाने के दस मिनट बाद डाक्टरों की एक टीम सजा पाने वाले की जाँच करती है और मरने की पुष्टि होने पर उसे नीचे उतार लिया जाता है.

 

 

 

 

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