यहां है लैला-मजनू की मजार, यहां Love की सलामती की मन्नत मांगने आते हैं लोग

नई दिल्ली। प्यार (Love) को किसी की इजाजत की जरूरत नहीं होती है। लैला-मजनू, सोनी-महिवाल और रोमियो-जुलिएट जैसे हजारों नाम हैं, जिन्होंने अपने प्यार के लिए मौत को भी हंसकर गले लगा लिया। इतिहास के पन्नों पर अमर इन प्रेमियों की दास्तान आज भी प्रेमी जोड़ों को अपने प्यार के लिए मर-मिटने का पैगाम देती हैं।यह मजार राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में है। पाकिस्तान की सीमा से यह महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। इस साल भी यहां सैकड़ों की संख्या में विवाहित और प्रेमी जोड़े यहां पहुंचे। इस बार मेला मंगलवार को आरंभ हुआ और बुधवार तक चला।

लैला-मजनू की प्रेम कहानी ने उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना दिया। जीते जी भले ही उन्हें मोहब्बत के दुश्मनों ने मिलने नहीं दिया लेकिन मौत के बाद उन्हें कोई एक-दूसरे से जुदा नहीं कर पाया। लैला-मजनू की इस मजार पर हर साल सभी धर्मों के लोग अपनी हाजिरी लगाने के लिए आते हैं।

यहां हिंदुस्तान और पाकिस्तान से प्रेमी जोड़े आते हैं इतना ही नहीं इस मजार पर आनेवाले लोगों में हिंदू, मुस्लिम के अलावा सिख और ईसाई धर्म के लोग भी शामिल हैं। मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र मजार प्रेम करने वालों के लिए बेहद खास है।

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लैला और मजनू ने अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हे पाकिस्तान बॉर्डर से महज़ 2 किलोमीटर दूर राजस्थान के गंगानगर जिले की ज़मीन पर गुजारे थे। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित एक पोस्ट को बीएसएफ की ‘मजनू पोस्ट’ नाम दिया गया है।

लैला-मजनू की यह प्रेम कहानी उस समय की है जब सिंध में अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस यानी मजनू को लैला नाम की लड़की प्यार हो गया। लैला-मजनू को एक-दूसरे से अलग करने के लिए लैला की शादी किसी और से करवा दी गई थी। इसके बाद लैला अपने पति के साथ ईराक चली गई जहां बीमार रहने के चलते कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई थी और लैला की कब्र के पास ही मजनू की लाश भी बरामद हुई थी।

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