UA-128663252-1

यहां है दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पुस्तकों का खजाना, जानें खासियत

नई दिल्ली। राजस्थान में बीकानेर रियासत की अपनी अलग पहचान है। बीकानेर राजपरिवार के प्रति यहां की जनता का गहरा मान-सम्मान है। बीकानेर रियासत के पूर्व राजपरिवार के संरक्षण में दुनिया की दुर्लभ पुस्तकों का अनमोल खजाना मौजूद है। एहतियातन इसे आम लोगों से दूर रखा गया है।

बीकानेर के दसवें महाराजा अनूप सिंह ने ऐतिहासिक अनूप संस्कृत पुस्तकालय की स्थापना की थी। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हस्तलिखित ग्रन्थों का नायाब खजाना यहां है। जिसे अनूप सिंह ने मुगल सम्राट औरंगजेब के दक्षिण सैन्य अभियानों में जीते गए प्रदेशों से हासिल ग्रन्थों से समृद्ध किया था।

Gyan Dairy

महाराजा अनूप सिंह स्वयं संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने विभिन्न प्रदेशों से विद्वानों को बीकानेर में आश्रय भी दिया था। अनूप सिंह के कार्यकाल में विद्वानों ने अमूल्य ग्रन्थों की रचना की। आजादी के बाद तक इस पुस्तकालय में देश-विदेश के सैकड़ों शोधार्थी ज्ञान की दौलत हासिल करने आते थे। इटली के विद्वान एल.पी. टेस्सीटोरी ने इस पुस्तकालय के हज़ारों ग्रन्थों को एक सूची में पिरोया था। इस पुस्तकालय में संगीत के एक सौ आठ बहुमूल्य हस्तलिखित ग्रन्थ हैं। ऐतिहासिक लालगढ़ पैलेस परिसर में होटलों से घिरा यह पुस्तकालय आम लोगों की पहुंच से दूर है।

Share