यहां दूल्हा नहीं, उसकी बहन लेती है दूल्हन के साथ सात फेर, जानें दिलचस्प रिवाज

नई दिल्ली। हमारे देश में शदियों रीति रिवाज बेहद दिलचस्प हैं। हर समाज में शादियों के अलग रीति रिवाज है। आज हम आपको शादियों में होने वाले ऐसे रिवाज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस जानकार आप दंग रह जाएंगे।

दरअसल, गुजरात के आदिवासी इलाके के सुरखेड़ा, सानदा और अंबल तीन गांवों में शादी के दौरान दूल्हा नहीं जाता। उसके स्थान पर उसकी बहन दुल्हन के घर जाती है। दूल्हे की बहन ही दुल्हन के साथ विवाह करके उसे घर लेकर आती है। यहां दूल्हे को अपनी शादी में जाने की अनुमति नहीं होती।

इस आदिवासी समाज में दूल्हा अपनी शादी के दिन अपने घर में रहता है। दूल्हे की बहन बारात में जाकर दूल्हे की सारी रस्में पूरी करती है। इतना ही नहीं अगर दूल्हे की बहन नहीं होती तो परिवार की कोई कुंवारी कन्या दूल्हे की ओर से बारात लेकर दुल्हन के घर जाती है और सारे रीति-रिवाज से शादी कर दुल्हन को अपनी घर वापस लाती है।

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हालांकि दूल्हे को पूरी तरह तैयार किया जाता है। उसके हाथों में मेहंदी लगती है। उसे साफे के साथ शेरवानी पहनाई जाती है और हाथ में तलवार दी जाती है, बस उसे घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता। आम तौर पर सारी पारंपरिक रस्में जो दूल्हा निभाता है वह उसकी बहन करती है। यहां तक कि ‘सात फेरे’ भी बहन ही लेती है।’ इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि इस परंपरा का पालन यहां के केवल तीन गांवों में ही होता है।

ऐसा माना जाता है कि अगर हम इसका पालन न करें तो कुछ न कुछ अशुभ जरूर घटित होता है। सुरखेड़ा गांव के मुखिया रामसिंहभाई राठवा ने ये भी बताया कि हमने कई बार इस परंपरा को तोडऩे की कोशिश भी की। जब भी लोगों ने इस परंपरा को अस्वीकार कर इसकी अनदेखी की है उनका भारी नुकसान हुआ है। शादी टूट जाती है या फिर कोई अनहोनी हो जाती है। माना जाता है कि सुरखेड़ा, सानदा और अंबल के ग्राम देवता कुंवारे हैं। इसलिए उन्हें सम्मान देने के लिए दूल्हे घर पर ही रहते हैं। ऐसा करने से दूल्हे सुरक्षित रहते हैं।

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