इस मंदिर में हवा में झूलता है एक खंभा, सदियों से बना रहस्य

नई दिल्ली। हमारे देश के मंदिरों में कई ऐसे रहस्य जिनका रहस्य हजारों साल से आज तक नहीं सुलझा है। ऐसा ही रहस्यमयी मंदिर आंध्रप्रदेश के अनंतपुर में है। इस मंदिर का नाम लेपाक्षी मंदिर है। लेपाक्षी मंदिर विजयनगर शैली से निर्मित कलात्मक मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर का एक खंभा जो हवा में झूलता रहता है।

लेपाक्षी मंदिर 70 खम्भों पर खड़ा है जिसमे से एक खम्भा जमीन को छूता नहीं है बल्कि हवा में ही लटका हुआ है। इस एक झूलते हुए खम्भे के कारण इसे ‘हैंगिंग टेम्पल’ कहा जाता है। यह खंभा भी पहले जमीन से जुड़ा हुआ था। इस मंदिर के बीचों बीच एक नृत्य मंडप है।

इस मंडप पर कुल 70 पिलर यानी खंभे मौजूद हैं, जिसमें से 69 खंभे वैसे ही हैं, जैसे होने चाहिए। मगर एक खंभा दूसरों से एकदम अलग है, वो इसलिए क्योंकि ये खंभा हवा में है। यानी इमारत की छत से जुड़ा है, लेकिन जमीन के कुछ सेंटीमीटर पहले ही खत्म हो गया। बदलते वक्त के साथ ये अजूबा एक मान्यता बन चुका है। ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई इंसान खंबे के इस पार से उस पार तक कोई कपड़ा ले जाए, तो उसकी मुराद पूरी हो जाती है।

हवा में झूलते खंभे पर टिका है मंदिर

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पहले लोग सोचते थे कि शायद मंदिर की मंदिर का वजन बाकी के 69 खंभों पर है, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के एक ब्रिटिश इंजीनियर हैमिल्टन ने 1902 में इमारत का आधार पता करने के लिए हवा में झूलते खंभे पर हथौड़े से वार किए। इस खंभे पर हुए वार से करीब 25 फीट दूर मौजूद कुछ खंभों पर दरारें आ गईं। यानी ये साफ हो गया कि इमारत का सारा वजन यानी इमारत का आधार इसी खंभे पर टिका है, जिसे छेड़ने से पूरी इमारत धराशाई हो सकती है।

यहीं गिरे थे पक्षीराज जटायू
यह मंदिर भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान वीरभद्र को समर्पित हैं। यहां तीन मंदिर हैं। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार है त्रेतायुग में जब रावण, श्रीराम की पत्नी का हरण कर ले जा रहा था तब जटायु ने रावण से यहीं युद्ध किया था। युद्ध के दौरान वह घायल होकर यहीं गिरे थे। इस मंदिर का निर्माण 1583 में दो भाइयों विरुपन्ना और वीरन्ना ने कराया था जो की विजयनगर राजा के यहां काम करते थे। हालांकि पौराणिक मत कुछ और ही है उसके अनुसार लेपाक्षी मंदिर परिसर में स्थित विभद्र मंदिर का निर्माण ऋषि अगस्त्य ने करवाया था।

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