भारत के सबसे खुंखार डाकू, इनके नाम से कांपती थी पुलिस

नई दिल्ली। देश में कुछ साल पहले तक कई राज्यों में खुंखार डाकुओं की दहशत हुआ करती थी। हालांकि समय के साथ सरकार ने इन पर काबू पा लिया था। लेकिन आज भी डाकुओं के किस्से आम जनमानस के दिलों में बसे हैं। ऐसे ही मशहूर और खतरनाक डाकुओं के बारे में बात कर रहे हैं जिनका नाम सुनते ही आम लोग क्या पुलिस भी डर के मारे कांपने लगती थी।

निर्भय सिंह गुर्जर
भारत के सबसे खतरनाक डाकुओं में शुमार निर्भय सिंह गुर्जर की दहशत उत्तर प्रदेश से लेकर मध्यप्रदेश तक फैली थी। निर्भय सिंह गुर्जर भारत का सबसे खतरनाक डाकू माना जाता था। निर्भय सिंह को गुर्जर चंबल के मशहूर डाकुओं में से एक माना जाता है। निर्भय ने खुद की एक फौज तैयार की थी, जिसमें करीब 50 लोग शामिल थे। निर्भय सिंह के खौफ से आसपास के 200 गांव के लोग डरते थे। यहीं नहीं सरकार ने निर्भय सिंह गुर्जर को पकड़ने के लिए 50 हजार रुपये का ईनाम भी रखा था। इसकी बढती दहशत को देखते हुए 2005 में पुलिस ने इसका एनकाउंटर कर दिया।

फूलन देवी

फूलन देवी भारत की सबसे खतरनाक महिला डाकू थीं। इनसे केवल इनका ही राज्य नहीं बल्कि पूरा भारत कांपता था। कहा जाता है फूलन देवी ने डकैती के रास्ते को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें अपने साथ हुए अत्याचार का बदला लेना था। पूनम देवी उर्फ फूलन देवी ने तकरीबन 21 ठाकुरों को एक साथ खड़ा करके गोली मार दी थी। साल 1983 में फूलन देवी ने सरेंडर कर दिया और 11 साल तक कारावास के बाद उन्होंने एक आम जिंदगी जी। बाद में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा सदस्य भी बनीं। हालांकि साल 2001 में उनकी हत्या कर दी गई थी।

चंदन तस्कर वीरप्पन

साउथ इंडिया में वीरप्पन का नाम सुनते ही पुलिस और जनता दोनों ही बहुत परेशान हो जाते थे। वीरप्पन बहुत खतरनाक डाकू था जिसका केरल और तमिलनाडू के जंगलों में पूरा दबदबा था। इसके ऊपर 920000$ का इनाम भी रखा गया था। वीरप्पन ने अपनी पूरी फौज भी बना रखी थी। कई सालों तक वह पुलिस और सैन्यबलों से बचता भी रहा लेकिन 2014 में एनकाउटर में उसको मार दिया गया।

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डाकू मान सिंह

चंबल के कुख्यात डाकू मान सिंह अमीरों की डकैती करके गरीबों का बीच पैसा बांट देते थे। मानसिंह गरीबो के बीच मशहूर डाकू था। लेकिन उसने पुलिस के नाक में दम कर रखा था। इस डाकू को 1995 में फांसी की सजा दे दी गई। खेरा राठौड इलाके में मान सिंह का एक मंदिर है, जहां उसकी पूजा की जाती है।

सुल्ताना डाकू

अमीर लोग गुनहगार लोगों की लूट करके यह गरीबो की मदद करता था। ब्रिटिश सरकार ने उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद में उन्हें फांसी भी दे दी थी। यह डाकू गरीब लोगों का मसीहा था लेकिन इसकी दहशत से कोई इसके सामने सिर भी नहीं उठा पाता था। नजीबाबाद में एक किला को सुल्तान किला के नाम से जाना जाता है। डाकू होने के बावजूद सुल्तान डाकू को गरीबों का मसीहा कहा जाता था। सुल्तान डाकू गरीबों के लिए बहुत अच्छे कार्य करता था।

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