यहां अपनी बहन के साथ नहीं जा सकता है कोई भाई, जानें रहस्य

नई दिल्ली। हमारे देश में बहुत सारी ऐसी जगहें हैं, जहां पर पुरुषों का प्रवेश वर्जित है, वहीं कुछ ऐसी भी जगहें हैं जहां महिलाओं का जाना मना है। हालांकि आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां भाई अपनी बहन के साथ नहीं जा सकता है। हां अगर कोई अपनी पत्नी या प्रेमिका के साथ जाना चाहता है तो उसके लिए कोई पाबंदी नहीं है।

यह अनोखी इमारत उत्तर प्रदेश के जालौन में स्थित है। करीब 210 फीट ऊंची इस इमारत का नाम ‘लंका मीनार’ है। ऐसी मान्यता है यहां भाई-बहन एक साथ नहीं जा सकते। इसका कारण ये है कि लंका मीनार की नीचे से ऊपर तक की चढाई में सात परिक्रमाएं करनी होती हैं, जो भाई-बहन नहीं कर सकते। ये फेरे केवल पति-पत्नी  के मान्य माने गए हैं। इसीलिए भाई-बहन का एक साथ यहां जाना मना है।

इस मीनार के अंदर रावण के पूरे परिवार का चित्रण किया गया है। इस मीनार का निर्माण मथुरा प्रसाद ने कराया था जो की रामलीला में रावण के किरदार को दशकों तक निभाते रहे। रावण का पात्र उनके मन में इस कदर बस गया कि उन्होंने रावण की याद में लंका का निर्माण करा डाला। 1875 में मथुरा प्रसाद निगम ने रावण की स्मृति में यहां 210 फीट ऊंची मीनार का निर्माण कराया था, जिसे उन्होंने लंका का नाम दिया। सीप, उड़द की दाल, शंख और कौडिय़ों से बनी इस मीनार को बनाने में करीब 20 साल लगे।

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उस समय इसकी निर्माण लागत 1 लाख 75 हजार रुपए आंकी गई थी। स्वर्गीय मथुरा प्रसाद न केवल रामलीला का आयोजन कराते थे, बल्कि इसमें रावण का किरदार भी वो स्वंय निभाते थे। मंदोदरी की भूमिका घसीटीबाई नामक एक मुस्लिम महिला निभाती थी। इसमें सौ फीट के कुंभकर्ण और 65 फीट ऊंचे मेघनाथ की प्रतिमाएं लगी हैं। वहीं मीनार के सामने भगवान चित्रगुप्त और भगवान शंकर की मूर्ति है।

यहां मंदिर का निर्माण इस तरह कराया गया है कि रावण अपनी लंका मीनार से भगवान शिव के किसी भी समय दर्शन कर सकता है। मीनार की रखवाली के लिए 180 फीट लंबे नाग देवता और 95 फीट लंबी नागिन मुख्य दरवाजे पर बैठी है। जो कि मीनार की रखवाली करते हैं।

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