कर्म से ऊपर कोई नहीं, स्वार्थी व्यक्ति लक्ष्य से जाता है दूर

सफलता क्या है? इसका सीधा-सा जवाब है अपने लक्ष्य को प्राप्त करना। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को दिशा देने के लिए कई लक्ष्यों का चुनाव करता है, जिसे प्राप्त कर लेने को सफलता माना जाता है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, तभी आप अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।

कर्म से ऊपर कोई नहीं
इंसान को कभी अपने कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। उसका जीवन उसके कर्मों के आधार पर ही फल देगा, इसलिए कर्म करने में कभी हिचकना नहीं चाहिए, जीवन में स्थायित्व और निष्क्रियता शिथिलता प्रदान करती है।

दूसरों की बातें नहीं, आत्मा है व्यक्ति की पहचान
गीता के श्लोक में भगवान कृष्ण ने मानव शरीर को मात्र एक कपड़े का टुकड़ा कहा है। ऐसा कपड़ा जिसे आत्मा हर जन्म में बदलती है। अर्थात मानव शरीर, आत्मा का अस्थायी वस्त्र है, जिसे हर जन्म में बदला जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि हमें शरीर से नहीं उसकी आत्मा से व्यक्ति की पहचान करनी चाहिए।

क्रोध को साथ लेकर लक्ष्य प्राप्ति नहीं की जा सकती
हम क्रोध को एक सामान्य भावना मानते हैं लेकिन ये सामान्य भावना व्यक्ति के भीतर भ्रम की स्थिति पैदा करती है। इसके फलस्वरूप हमारा मस्तिष्क सही और गलत के बीच अंतर करना छोड़ देता है, इसलिए इंसान को क्रोध के हालातों से बचकर हमेशा शांत रहना चाहिए।

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अति बुद्धि-विवेक को करती है नष्ट
आपने कई बार सुना होगा कि किसी भी प्रकार की अधिकता इंसान के लिए घातक सिद्ध होती है। संबंधों में कड़वाहट हो या फिर मधुरता, खुशी हो या गम, हमें कभी भी ‘अति’ नहीं करनी चाहिए। जीवन में संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।

स्वार्थी व्यक्ति लक्ष्य और सत्य से जाता है दूर
व्यक्ति का स्वार्थ उसे अन्य लोगों से दूर ले जाकर नकारात्मक हालातों की ओर धकेलता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति अकेला रह जाता है। स्वार्थ शीशे में फैली धूल की तरह है, जिसकी वजह से व्यक्ति अपना प्रतिबिंब ही नहीं देख पाता। अगर जीवन में खुश रहना चाहते हैं तो स्वार्थ को कभी अपने पास भी न आने दें।

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