मंदसौर के लोग रावण को मानते हैं दामाद, प्रतिमा देख महिलाएं कर लेती हैं घूंघट

नई दिल्ली। हमारे देश में जब कोई अहंकार की पराकाष्ठा को पार करता है तो उसे रावण की संज्ञा दी जाती है। हालांकि इससे भी कोई इंकार नहीं कर सकता है कि रावण एक प्राकांड विद्वान था। उसे चारों वेद और पुराण कंठस्थ थे। एमपी के मंदसौर में तो लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। मंदसौर की बहुएं रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट डालकर जाती हैं।

मंदसौर जिले को लंकाधिपति रावण की ससुराल माना जाता है। उसकी रानी मंदोदरी मंदसौर की ही बेटी मानी जाती हैं। दरअसल पहले मंदसौर का नाम दशपुर था। मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की 10 सिरों वाली प्रतिमा स्थापित है।

मंदसौर में दशहरा के दिन यहां के नामदेव समाज के लोग प्रतिमा के समक्ष उपस्थित होकर पूजा-अर्चना करते हैं। उसके बाद राम और रावण की सेनाएं निकलती हैं। रावण के वध से पहले लोग रावण के समक्ष खड़े होकर क्षमा-याचना मांगते हैं। वे कहते हैं, “आपने सीता का हरण किया था, इसलिए राम की सेना आपका वध करने आई है।”
स्थानीय लोग बताते हैं कि रावण मंदसौर का दामाद था, इसलिए महिलाएं जब प्रतिमा के सामने पहुंचती हैं तो घूंघट डाल लेती हैं।

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मान्यता है कि इस प्रतिमा के पैर में धागा बांधने से बीमारी नहीं होती। यही कारण है कि अन्य अवसरों के अलावा महिलाएं दशहरे के मौके पर रावण की प्रतिमा के पैर में धागा बांधती हैं। इसी तरह विदिशा जिले के नटेरन तहसील में रावण गांव में रावण की पूजा होती है। इस गांव में लोग रावण को बाबा कहकर पूजते हैं। यहां उसकी मूर्ति भी है और सभी काम शुरू होने से पहले रावण की प्रतिमा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि रावण की पूजा किए बगैर कोई भी काम सफल नहीं होता। इतना ही नहीं नवदंपति रावण की पूजा के बाद ही गृह प्रवेश करते हैं।

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