इस बावली का पानी पीने के बाद झगड़ा करने लगते थे लोग, जानें रहस्य

नई दिल्ली। हमारे देश में कई ऐसी रहस्यमयी चीजें हैं, जिनके बारे में कोई पता नहीं लगा पाया है। उन्हीं जगहों में से एक है ‘तांत्रिक बावली’ जो आज भी रहस्यमय बनी हुई है। मध्य प्रदेश के श्योपुर शहर से 20 किमी दूर गिरधरपुर कस्बे में एक महल में ‘तांत्रिक बावली’ है। बताया जाता है कि यह महल करीब 250 साल पुराना है। इस बावली से जुडी कहानी बताते है कि इस बावली का पानी पीने से सगे भाई तक आपस में लडने-झगडने लगते थे। राजपरिवार और अन्य लोगों के साथ जब ऐसी घटनाएं बढ़ गईं तो शासक ने इस बावली को बंद करने का फैसला लिया।

बताया जा रहा है कि इस शहर को राजा गिरधर सिंह गौड ने बसाया था। राजा गिरधर सिंह ने 250 साल पहले अपने शासनकाल में गढी में 8 बावलियां तैयार करवाई थीं। इसमें एक बावली है, जिसे तांत्रिक बावली कहा जाता है। इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है कि यह नगर जादूगरों और तांत्रिकों के लिए प्रसिद्ध रहा है। तांत्रिकों को लेकर लोगों के बीच एक भय आज भी बना हुआ है। कहते है कि एक बार दो जादूगरों के बीच कडा मुकाबला हुआ। एक जादूगर ने ताड़ के पेड को जादू से पेड को तोड दिया, तो दूसरे ने उसे जोड़ दिया। लेकिन पेड के जुडने में एक सिरा थोड़ा अंतर से जुडा। यह पेड़ काफी दिनों तक मौजूद रहा।

Gyan Dairy

इस बावली को लेकर गांववालों के बीच एक किस्सा जुबान पर है। लोग कहते हैं कि इस बावली का पानी पीने से सगे भाई झगडने लगते थे। जब राजपरिवार और अन्य लोगों के बीच ऐसी घटनाएं होने लगी तो राजा ने इस पटवा दिया। ऐसा बताया जाता है कि एक नाराज तांत्रिक ने जादू-टोना कर दिया था, जिसके बाद से इस बावली के पानी का ऐसा प्रभाव हो गया था। यह बावली करीब 100 वर्ग फीट की है और यह 10 फीट गहरी है। यह बावली गढी परिसर में सोरती बाग में शिवजी के स्थान के पास स्थित है। यहां पहले आम के पेड़ थे और इस बाग में राजा अक्सर आते थे। आज यहां चार-पांच बावलियां बची हैं। एक बावली में आज भी पानी भरा रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share