समुद्र में बने सदियों पुराने इस मंदिर की रक्षा करते हैं जहरीले सांप

नई दिल्ली। मंदिरों में कई ऐसे राज छिपे हैं, जिनके बारे में शायद ही कोई जानता हो। आज हम सदियों पुराने एक भी एक 600 साल पुराने अनोखे मंदिर के बारे में ही बात करने जा रहे हैं। यह भारत का नहीं बल्कि इंडोनेशिया का हैं जो कि समुद्र में स्थित हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात ये हें कि, इस मंदिर की रक्षा विषैले सांप करते हैं। आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम तनाह लोत मंदिर हैं ।

यह मंदिर सागर तट पर स्थित एक बड़ी सी चट्टान पर बना है। इस चट्टान का निर्माण हजारों साल के दौरान समुद्री पानी के ज्वार से हुए क्षरण के फलस्वरूप हुआ है । दरअसल, स्थानीय भाषा में ‘तनाह लोत’ का मतलब समुद्री भूमि होता है। यह मंदिर बाली में सागर तट पर बने उन सात मंदिरों में से एक है, जिन्हें एक श्रृंखला के रूप में बनाया गया है, जिसकी खासियत ये है कि हर मंदिर से अगला मंदिर स्पष्ट दिखता है। यह मंदिर जिस शिला पर टिका हुआ है, वह 1980 में कमजोर होकर झड़ने लगी थी, जिसके बाद मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र को खतरनाक घोषित कर दिया गया था मगर बाद में जापान सरकार ने इसे बचाने के लिए इंडोनेशियाई सरकार की मदद की थी जिसके बाद चट्टान के लगभग एक तिहाई हिस्से को कृत्रिम चट्टान से ढंककर एक नया रूप दिया गया ।

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इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि, तनाह लोत मंदिर का निर्माण 15वीं सदी में निरर्थ नाम के एक पुजारी ने कराया था। समुद्र तट के किनारे-किनारे चलते हुए वो इस जगह पर पहुंचे थे, जिसके बाद इस जगह की सुंदरता उन्हें भा गई। वो यहां रात भर ठहरे भी थे। उन्होंने ही आसपास के मछुआरों से इस जगह पर समुद्र देवता का मंदिर बनाने का आग्रह किया था। इस मंदिर में पुजारी निरर्थ की भी पूजा होती है। माना जाता है कि बुरी आत्माओं और बुरे लोगों से इस मंदिर की सुरक्षा इसकी शिला के नीचे रहने वाले विषैले और खतरनाक सांप करते हैं ।

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