इस थाने में पीड़ितों का दर्द सुनते हैं प्रभु श्रीराम, इजाजत मिलने पर होता है मुकदमा

नई दिल्ली। भगवान श्रीराम की राज्य व्यवस्था को आज भी आदर्श माना जाता है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के एक पुलिस थाने में आज भी भगवान श्रीराम जनता को न्याय का पाठ पढ़ाकर कुशल प्रशासक बने हुए हैं। छतरपुर जिले के ईशानगर पुलिस थाने में पिछले 25 साल से भगवान श्रीराम का राज कायम है। यहां पर फरियादी की फरियाद थाना प्रभारी नहीं, बल्कि भगवान खुद सुनते हैं। यहां पर एफआईआर भगवान के दरबार में अर्जी लगाने के बाद ही लिखी जाती है। थाना में तैनात पुलिस अमला अपने आप को भगवान का सेवक बताकर अपनी ड्यूटी करता है।

हालांकि इस थाने में रिपोर्ट तो पुलिसकर्मी ही लिखते हैं, लेकिन भगवान के दरबार में जाकर अनुमति लेने के बाद। शिकायतकर्ता को भी पहले भगवान राम के आगे पेश होना पड़ता है, उसके बाद ही उसकी सुनवाई पुलिस अमला करता है। यहां हर काम की शुरूआत भगवान राम की सेवा-सुश्रषा से होती है। सूर्य की पहली किरण के साथ भगवान राम की आरती उतारी जाती है। इसमें सभी पुलिसकर्मियों को अपना सब काम छोडक़र शामिल होना होता है। आरती और पूजा के बाद भगवान श्रीराम को सलामी दी जाती है और दर्शनों के बाद थाने का रोजनामचा खुलता है। मान्यता है कि कोई पुलिसकर्मी या अधिकारी वहां विराजमान भगवान का निरादर करता है या पूरा सम्मान नहीं देता है, तो उसे दंड भुगतना पड़ सकता है।

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यहां भगवान श्रीराम के आने की कहानी भी निराली है। बताते हैं कि ईशानगर गांव के राम जानकी मंदिर से कई साल पहले चोर भगवान को चुराकर ले गए थे, लेकिन कुछ दूर जाने के बाद इस मूर्ति इतनी का वजन इतना बढ़ गया कि चोर इन्हें उठा तक नहीं पाए। बाद में पुलिस ने इन्हें उस स्थान से बरामद कर थाना के मालखाने में रख दिया। जब मामले का निस्तारण हुआ तो अदालत ने इन मूर्तियों को मंदिर में शिफ्ट करने का आदेश सुनाया। तभी से भगवान का यह दरबार थाने के मालखाने में लगा हुआ है।
बहरहाल भगवान श्रीराम थाने में आने वाले पीडि़तों का खुद न्याय कर रहे हैं। क्योंकि थाने में श्रीराम बिराज रहे हैं, इसलिए यहां चप्पल पहनना, गुटखा-तंबाकू खाना, शराब का सेवन करना और गाली-गलौच करने पर पाबंदी है। अब पाठक इसे किसी भी रूप में लें, मगर बहरहाल यह थाना थाना देश के आदर्श पुलिस थानों में शुमार है।

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