इस गांव में हर शख्स के शरीर पर लिखा है राम नाम, जानें वजह

नई दिल्ली। अगामी 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की आधारशिला रखेंगे। पूरा देश अपने आराध्य प्रभु श्रीराम का मंदिर बनता हुआ देखेगा। करीब 500 साल के वनवास के बाद रामलला अपने मंदिर में विराजेंगे। इस मौके पर हम आपको भगवान राम और उनसे जुड़ी कई दिलचस्प चीजें आप तक पहुंचाएंगे। आज हम आपको छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज के बारे में बताएंगे।

जाति व्यवस्था हमारे समाज की बर्बादी का प्रमुख कारण हैं। मुस्लिम आक्रांताओं से लेकर अंग्रेजों ने इसका भरपूर लाभ उठाकर सैकड़ों सालों तक हम पर राज किया। आज हम आपको एक ऐसे समाज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे तथाकथित उच्च वर्ग ने मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया तो इस समाज के पूरे गांव ने अपने शरीर पर भगवान श्रीराम के दिव्य राम नाम को गुदवा लिया।

छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की में आज भी ऐसी ही एक परंपरा का लोग पालन कर रहे हैं जिसे देखकर हैरानी होना स्वाभाविक है। दरअसल, इस समाज के लोग अपने पूरे शरीर में रामनाम का टैटू बनवाते हैं जिसे सामान्य भाषा में गोदना कहा जाता है। यह परंपरा लगभग 100 वर्षो से भी से अधिक समय से चली आ रही है।

इस वजह से इस समाज ने शुरू की थी राम नाम टैटू बनवाने की परंपरा, समय के साथ टैटू बनवाना हुआ कम, फिर भी परंपरा को मिल रहा है बढ़ावा,रामनामी समज के लोग बड़ी सख्ती से करते हैं इस परंपरा का पालन, राम नाम टैटू गुदवाने वालों को तीन भागों में बांटा जाता है।
विचित्र बात तो यह है कि इस समाज के लोग न मंदिर जाते हैं और न पूजा-अर्चना करते हैं। उनकी इस परंपरा को भगवान की भक्ति समेत सामाजिक बगावत के तौर पर देखा जाता है।

मान्यताओं के अनुसार 100 साल पहले गांव में उच्च जाति के हिन्दू लोगों ने इस समाज को मंदिर में घुसने से मना कर दिया था, जिसके बाद से ही समाज ने विरोध करने के लिए पूरे शरीर पर राम नाम टैटू बनवाना शुरू कर दिया था। जानकारी के मुताबिक, रामनामी जाति के लोगों की आबादी लगभग एक लाख है, जिसमें से छत्तीसगढ़ के चार जिलों में इनकी संख्या अधिक है।

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इनमें टैटू बनवाना आम बात है। हालांकि, समय के साथ टैटू को बनवाने का चलन कम हुआ है क्योंकि नई पीढ़ी के लोगों को पढ़ाई और काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना पड़ता है।
फिर भी शरीर के किसी हिस्से पर राम-राम लिखवाकर नई पीढ़ी के लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस समाज में जन्म लेने वाले बच्चों के शरीर के कुछ हिस्सों में टैटू बनवाना बहुत जरूरी है। खासतौर पर छाती पर और वो भी दो साल का होने से पहले।

इतना ही नहीं, परंपरा के अनुसार टैटू बनवाने वाले लोगों को शराब पीने की मनाही के साथ रोजाना राम नाम लेना जरूरी है। ज्यादातर रामनामी लोगों के घरों की दीवारों और कपड़ों पर ही राम-राम लिखा होता है। “रामनामियों की पहचान राम-राम का गुदना गुदवाने के तरीके के मुताबिक की जाती है। शरीर के किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाने वालों को ही रामनामी माना जाता है।”

बता दें कि इनमें माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को ‘शिरोमणि’, पूरे माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को ‘सर्वांग रामनामी’ और पूरे शरीर पर राम नाम लिखवाने वाले को ‘नखशिख रामनामी’ कहा जाता है।

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