भगवान बद्रीनाथ मंदिर में नहीं बजाया जाता है शंख, जानिए वजह

नई दिल्ली। हिंदू धर्म के चार धामों में से बद्रीनाथ मंदिर में शंख बजाने पर प्रतिबंध है। इस मंदिर में भगवान श्रीहरि विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर में पूजा करते समय शंख बजाना अनिवार्य होता है, लेकिन यह एक ऐसा मंदिर है, जहां शंख बजाया नहीं जाता है। हालांकि, इसके पीछे एक पौराणिक और बेहद ही रहस्यमय कहानी छुपी हुई है।

इस मंदिर में शंख नहीं बजाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि एक वक्त में हिमालय क्षेत्र में दानवों का बड़ा आतंक था। वो इतना उत्पात मचाते थे कि ऋषि मुनि न तो मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना तक कर पाते थे और न ही अपने आश्रमों में। यहां तक कि वो उन्हें ही अपना निवाला बना लेते थे। राक्षसों के इस उत्पात को देखकर ऋषि अगस्त्य ने मां भगवती को मदद के लिए पुकारा, जिसके बाद माता कुष्मांडा देवी के रूप में प्रकट हुईं और अपने त्रिशूल और कटार से सारे राक्षसों का विनाश कर दिया।

Gyan Dairy

आतापी और वातापी नाम के दो राक्षस मां कुष्मांडा के प्रकोप से बचने के लिए भाग गए। इसमें से आतापी मंदाकिनी नदी में छुप गया जबकि वातापी बद्रीनाथ धाम में जाकर शंख के अंदर घुसकर छुप गया। इसके बाद से ही बद्रीनाथ धाम में शंख बजाना वर्जित हो गया और यह परंपरा आज भी चलती आ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share