इसलिए हारे का सहारा कहे जाते हैं खाटू श्याम बाबा, महाभारत युद्ध से जुड़ा है रहस्य

नई दिल्ली। राजस्थान के खाटू वाले श्याम बाबा को कौन नहीं जानता है। दुनियाभर में लोग इस बात से वाकिफ हैं कि खाटू श्याम बाबा को हारे का सहारा कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाभारत के बर्बरीक को ही खाटू श्याम बाबा के नाम से जाना जाता है। आज हम इसका पूरा रहस्य आपको बताने जा रहे हैं।

महाभारत काल में बर्बरीक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

पेड़ के पत्तों को भेदने वाले चमत्कार को देखकर कृष्ण चिंतित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण यह बात जानते थे कि बर्बरीक प्रतिज्ञावश हारने वाले का साथ देगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष बनाकर सुबह बर्बरीक के शिविर के द्वार पर पहुंच गए और दान मांगने लगे। बर्बरीक ने कहा- मांगो ब्राह्मण! क्या चाहिए?

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भगवान कृष्ण ने दिया वरदान
ब्राह्मणरूपी कृष्ण ने कहा कि तुम दे न सकोगे। लेकिन बर्बरीक कृष्ण के जाल में फंस गए और कृष्ण ने उससे उसका शीश मांग लिया। बर्बरीक द्वारा अपने पितामह पांडवों की विजय हेतु स्वेच्छा के साथ शीशदान कर दिया गया। बर्बरीक के इस बलिदान को देखकर दान के पश्चात श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया। आज बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है।

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