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इस मंदिर की चुंबकीय शक्ति से परेशान थी ब्रिटिश सरकार, पानी के जहाजों को खींच लेती थी अपनी तरफ

नई दिल्ली। हमारे देश के मंदिरों में बहुत सारे रहस्य छिपे हुए हैं। इनमें से कुछ रहस्यों से तो वैज्ञानिकों ने पर्दा उठाया है, लेकिन बहुत सारी चीजें अभी भी ऐसी हैं जिनके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। आज हम आपको कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां 52 टन का चुंबक लगा हुआ है।

ओडीशा के पुरी जिले में स्थित यह मंदिर चंद्रभागा नदी के किनारे बना कोणार्क का सूर्य मंदिर अद्भुत कला का नमूना है। इस मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। रथ में 12 जोड़े पहिये लगे हुए हैं।

कोणार्क मंदिर अपनी पौराणिकता और आस्था के लिए विश्व भर में मशहूर है। कोर्णाक मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए गए सूर्य भगवान के साक्षात दर्शन करने का सौभाग्य कम ही लोग को मिल पाता है। भारत के इस ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जा चुका है। इस मंदिर में 52 टन का विशालकाय चुंबक लगा हुआ था।

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सूर्य मंदिर के शिखर पर 52 टन का चुंबकीय पत्थर लगा हुआ था। यह पत्थर समुद्र की कठिनाइओं को कम करता था। जिसकी बदौलत मंदिर समुद्र के किनारे सैकड़ों दशकों से खड़ा हुआ है। एक समय ऐसा भी था जब मंदिर का मुख्य चुंबक, अन्य चुंबकों के साथ इस तरह की व्यवस्था से सजाया हुआ था कि मंदिर की मूर्ति हवा में तैरती हुई नजर आती थी।

लेकिन मंदिर की ये ताकतवर चुंबकीय व्यवस्था आधुनिक काल की शुरुआत में समस्या बनने लगी। चुंबकीय शक्ति इतनी तेज थी कि पानी के जहाज मंदिर की तरफ खींचे चले आते थे। अंग्रेजों के काल में जब उन्हें नुकसान होने लगा तो उन्होंने मंदिर के अंदर लगे इस चुंबक को निकाल दिया। लेकिन इससे जो हुआ, उसका किसी को अनुमान नहीं था। पूरे मंदिर को चुंबकीय व्यवस्था के हिसाब से बनाया गया था। विशालकाय चुंबक को निकालने की वजह से मंदिर का संतुलन बिगड़ गया। जिसकी वजह से मंदिर की कई दीवारें और पत्थर गिरने लगे।

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