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देश के इस भयावह जंगल में है मुर्दों का कब्जा,जानें रहस्य

हमारे देश में कई ऐसी जगहें हैं, जिनका रहस्य कोई नहीं सुलझा सका है। ऐसा ही एक जंगल हिमाचल प्रदेश में है। ये एक ऐसा जंगल है जहां पर सिर्फ मुर्दों का ही कब्जा है तो क्या कोई भी इस बात पर विश्वास करेगा। यह आपको अंधविश्वास ही लगेगा, लेकिन यह सच है। बताया जा रहा है कि एक ऐसी जगह है जहां पर इंसानों का कोई भी हक नहीं है। जंगल की हर डाली, हर शाखा पर और यहां की घास फूस पर भी सिर्फ मुर्दो की ही हक है। कोई भी उस जगंल की लकडी यूज नहीं कर सकता है।

घनघोर जंगल और उसके बीचों बीच हिमाचल प्रदेश जिला ऊना गगरेट के अंबोटा ग्राम पंचायत में स्थित है प्राचीन द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी जंगल के तीन और मरघट बने हैं जबकि एक ओर सोमभद्रा बह रही है। यह शहर-ए-खामोश का जंगल है। जी हां, गगरेट के प्राचीनतम द्रोण शिवबाडी जंगल की लकडी को घर के चूल्हों में जलाना वर्जित है। यहां की लकडी को सिर्फ शव जलाने के लिए ही इस्तेमाल में लाया जा सकता है। लगभग पांच वर्ग किलोमीटर में फैला यह घना जंगल अपने आप में प्रकृति की अद्भुत रचना है।

इसके बीचोंबीच स्थित द्रोण शिव मंदिर से जंगल के बाहरी हिस्सों में बने मरघटों का फासला करीब सात-सात सौ मीटर है। द्रोण शिव मंदिर के पुजारीयों का कहना है इस जंगल की लकडी को घर के चूल्हे में जलाना वर्जित है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिस किसी ने भी यहां से लकडी अपने घर को ले जाने का प्रयास किया तो उसके साथ अनिष्ट ही हुआ।

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पुजारी बताते हैं कि प्राचीनतम द्रोण शिव मंदिर के प्रांगण में द्वापर युग में पांडव गुरू द्रोणाचार्य यहां पांडवों को धनुर्विद्या सिखाया करते थे। कहा जाता है कि करीब दो दशक पहले यहां सेना के नौ जवानों ने जंगल से लकडी काटी थी। लकड़ी की खेप को वे फौजी जिस ट्रक में ले जा रहे थे वह ट्रक करीब तीन किलोमीटर आगे जाकर दुर्घटना का शिकार हो गया था। इसमें ट्रक में सवार सभी जवान अल्पकाल मृत्यु को प्राप्त हो गये थे।

इसी तरह यहां से लकडी ले जाने वाले और भी कई लोगों के साथ हादसे हुए हैं। आप की जानकारी के लिए बतादे की यहां पर एक ही रास्ता है आने जाने का, प्राचीनतम द्रोण शिव मंदिर में देश के विभिन्न शहरों से श्रद्धालु आते हैं। इस घने जंगल में लोगो को सही रास्ता दिखाने के लिए मार्ग को चिन्हित किया गया है उसी रास्ते से मंदिर तक जाने के बाद दर्शन करके श्रद्धालु उसी रास्ते से वापस लौटते हैं।

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