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हिमाचल के इस गांव में नहीं चलता भारत का कानून, जानिए दिलचस्प तथ्य

नई दिल्ली। हमारा देश विविधता में एकता को पिरोये हुए है। ऐसी ही एक अनोखी विविधता हिमाचल में देखने को मिलती है। आज हम आपको हिमाचल प्रदेश के एक प्राचीन गांव के बारे में बताएंगे। इस अनोखे गांव का अपना अलग संविधान है और अपनी अलग भाषा है। यहां के लोग देश के संविधान को नहीं मानते। इनकी भाषा कनाशी को भी इनके अलावा कोई और नहीं समझ सकता।

हिमाचल प्रदेश की कुल्लू वैली से 45 किलोमीटर दूर मलाणा नाम का एक प्राचीन गांव है। समुद्र तल से 9,842 फीट की ऊंचाई पर बसा मलाणा गांव पिछले कुछ सालों से रोमांच और नशे के शौकीनों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ है। यहां आने वाले ज्यादातर टूरिस्ट ‘मलाणा क्रीम’ यानी मारिजुआना के लिए यहां आते हैं। पार्वती वैली की इस जगह दुनिया का बेस्ट मारिजुआना मिलता है। यहां भारत का कानून नहीं चलता।

मलाणा दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक गांव माना जाता है। यहां कानून का पालन कराने के लिए 11 सदस्यीय समिति है। यह समिति जमलू ऋषि (पौराणिक देवता) का आदेश मानती है। इस समिति के हर फैसले को पूरा गांव मानता है।

गांव के इतिहास को लेकर मान्यता के मुताबिक, यहां के लोग आर्यों के वंशज हैं। एक कहानी यह भी है कि जब मुगल शासक अकबर गंभीर रूप से बीमार था तो मलाणा के लोगों ने ही इलाज करके उन्हें ठीक किया था। इससे अकबर इतने खुश हुए कि उन्होंने इस गांव के लोगों को टैक्स से छूट दे दी। एक मान्यता यह भी है कि सिकंदर के सैनिक यहां रुके थे और गांव के लोग उनके ही वंशज हैं। हालांकि, ग्रीक लैंग्वेज और यहां बोली जाने वाली कनाशी एक जैसी नहीं हैं। कनाशी संस्कृत और तिब्बती बोलियों का मिश्रण मिला जुला रूप है।

Gyan Dairy

मलाणा गांव के आसपास उगाई जाने वाली मारिजुआना (गांजा) को ‘मलाणा क्रीम’ कहा जाता है। 1994 और 1996 में हाई टाइम्स मैगजीन कैनेबिज कप इसे बेस्ट मारिजुआना का खिताब दे चुकी है। पार्वती वैली में काफी बड़ी मात्रा में इसकी खेती की जाती है। हालांकि, मुश्किल भौगोलिक स्थितियां होने के कारण इसे रोक पाना मुश्किल है। पुलिस से बचने के लिए गांव वाले अब घने जंगलों की तरफ मूव कर रहे हैं और वहां इसकी खेती कर रहे हैं।

मलाणा गांव में हर जगह लिखा है कि बाहरी लोग या टूरिस्ट मंदिर या घरों को नहीं छू सकते ऐसे करने पर उन्हें 1500 रुपए या इससे ज्यादा जुर्माना देना होगा। दरअसल मलाणा के लोगों का मानना है कि बाहरी लोग अपवित्र होते हैं। अगर कोई बाहरी यहां के घरों, मंदिरों और लोगों को छू लेता है तो उससे जुर्माना लिया जाता है। इस रकम से जानवर खरीदा जाता है और शुद्धिकरण के लिए बलि दी जाती है।

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