दुनिया की सबसे खूबसूरत रानी, जिसे कहा जाता था सुंदरता की देवी

नई दिल्ली। विश्व के इतिहास में कई ऐसी रानियां और राजकुमारियां हुईं जो सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर थी और इतिहास के पन्नो में उनका सौन्दर्य अमर है। आज हम आपको एक ऐसी ही राजकुमारी के बारे में बताने जा रहे हैं जो विश्व की सबसे खूबसूरत राजकुमारी के नाम से जानी जाती है।

मिस्र की राजकुमारी क्लियोपैट्रा को सुंदरता की देवी भी कहा जाता था। क्लियोपैट्रा को न सिर्फ उनकी सुंदरता के लिए जाना जाता है बल्कि उनका जीवन भी काफी रहस्मयी रहा था। जो आज भी खोजकर्ताओं को उनकी तरफ आकर्षित करता है। क्लियोपैट्रा जितनी सुंदर थी, उससे कहीं ज्यादा चतुर और षड्यंत्रकारी भी थी।

पिता की मृत्यु के बाद मात्र 14 वर्ष की आयु में क्लियोपैट्रा और उसके भाई टोलेमी दियोनिसस को संयुक्त रूप से राज्य प्राप्त हुआ। भाई को राज्य पर क्लियोपेट्रा की सत्ता सहन नहीं हुई और बगावत हो गई। क्लियोपैट्रा को अपनी सत्ता से हाथ धोना पड़ा और सीरिया में शरण लेनी पड़ी मगर इस राजकुमारी ने साहस नहीं छोड़ा।रोम के शासक जूलियस सीजर को अपने मोह में फंसाकर क्लियोपेट्रा ने मिस्र पर हमला करवाया और सीजर ने टोलेमी को मारकर क्लियोपैट्रा को मिस्र के राजसिंहासन पर बिठाया।

क्लियोपैट्रा की मौत से भी एक खास रहस्य जुड़ा हुआ है। रोमन राज्य के पहले सम्राट ऑगस्टस ने क्लियोपैट्रा की हार पर अपना शासन स्थापित किया था। शोध के अनुसार, जब ऑगस्टस के पास अपने सम्मान में साल के एक महीने का नाम अपने नाम पर रखने का मौका था, तो क्लियोपैट्रा की हार का एक वार्षिक अनुस्मारक बनाने के लिए उन्होंने आठवें महीने को चुना, जिसमें क्लियोपेट्रा की मृत्यु हुई थी।

ऑगस्टस क्लियोपैट्रा को रोम में एक बंदी के रूप में रखने वाले थे। लेकिन उसे रोकने के लिए क्लियोपैट्रा ने खुद को मार डाला। इससे साफ होता है कि क्लियोपैट्रा अपने प्यार के लिए नहीं मरी थी। क्लियोपैट्रा ने शर्मिंदा और असहाय होने की हिंसा को झेलने के बजाय मौत को चुना। क्लियोपैट्रा आज इतिहास में एक ऐसी रहस्यमयी शख्सियत के रूप में दर्ज हैं जिसके रहस्य पर से परदा हटाने का सिलसिला अभी रुका नहीं है।

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क्लियोपेट्रा के भाईयों ने किया विद्रोह
मिश्र की रानी क्लियोपेट्रा, जो ग्यारहवें टालेमी की बेटी थीं । इनके कई भाई थे, जो इनसे छोटे थे । इनके पिता की जब मृत्यु हुई, तो मिश्र की राजगद्दी का उत्तराधिकारी क्लियोपेट्रा को ही माना गया । वह बड़ी ही दूरदर्शी, शौकीन, महत्त्वाकांक्षी थीं। पुरुषवादी मानसिकता वाले उनके भाइयों ने उनकी अधीनता स्वीकार करने की बजाये, उनके प्रति विद्रोह कर दिया । राज्य के अन्य अधिकारियों को क्लियोपेट्रा की अधीनता स्वीकार न थी । अत: सभी ने मिलकर क्लियोपेट्रा को मिश्र से पूरी तरह से निर्वासित करने का निर्णय लिया ।उन्होंने इन्हें मिश्र से बाहर निकाल ही दिया था कि बाहर निकालने के वक्त गृहयुद्ध चल रहा था।

सीजर को सौन्दर्य जाल में फंसाया
उसी समय रोम का शासक सीजर मिश्र आया था। क्योंकि रोम के लोग अनाज विशेषकर गेहूं पर निर्भर थे । इधर क्लियोपेट्रा के दूरदर्शी दिमाग में यह सूझ चल रही थी कि यदि वह रोम के शासक सीजर तक किसी तरह पहुंच जायें, तो वह मिश्र की राजगद्दी पर पुन: काबिज हो सकती हैं । अत: उन्होंने यह उपाय सोचा कि वह सीजर के पास कुछ अनोखे, रोचक तरीके से जायेंगी । अत: उन्होंने मिश्र से एक कलात्मक बढ़िया कालीन मंगवाया, जिसे वह सीजर को पेश करना चाहती थीं। उस कालीन को सीजर के सामने पेश करने से पहले क्लियोपेट्रा ने स्वयं को उस कालीन में लपेट लिया था।

रूप देख तुरंत मदद को तैयार हुआ सीजर
जब कालीन में लिपटी अद्वितीय सुन्दरी क्लियोपेट्रा को सीजर ने देखा, तो वह क्लियोपेट्रा पर इतना अधिक मोहित हो गया कि सीजर उनकी सहायता के लिए तुरन्त ही तैयार हो गया । अचानक सीजर की मृत्यु हो गयी। इसके बाद रोमन साम्राज्य बंट गया। क्लियोपेट्रा का प्रेमी एंटोनी भी पराजित होकर आत्महत्या कर बैठा, तो क्लियोपेट्रा ने भी विष का सेवन कर इस संसार से मुंह मोड़ लिया। क्लियोपेट्रा का जीवन एक महत्त्वाकांक्षी सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति नारी का है, जो तत्कालीन समय में सौन्दर्य की देवी मानी जाती थीं । अपने सौन्दर्य के जतन के लिए वह उस समय के समस्त प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों का उपयोग करती थीं। उन्होंने महिलाओं को अपने सौन्दर्य की परख और पहचान करने की एक प्रेरणा दी थी ।

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