भारत का असली स्वर्ण मंदिर, जड़ा है 1500 किलो सोना

नई दिल्ली। सिख संप्रदाय के प्रमुख धार्मिक स्थल अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब को ‘स्वर्ण मंदिर’ कहा जाता है। चूंकि स्वर्ण मंदिर के बाहरी हिस्से में सोना जड़ा है, इसलिए इसे स्वर्ण मंदिर कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दक्षिण भारत में भी एक स्वर्ण मंदिर मौजूद है, जिसे दुनिया के अजूबों में शामिल किया गया है। यह मंदिर श्रीपुरम या महालक्ष्मी स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है।

श्रीपुरम की मुख्य विशेषता यहां स्थित लक्ष्मी नारायणी मंदिर है, जिसके ‘विमान’ (गर्भगृह का ऊपरी भाग) व ‘अर्ध मंडप’ शुद्ध सोने से ढका हुआ है। यह श्री लक्ष्मी नारायणी का आवासीय भाग है। यह पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर बन गया है, जिसके निर्माण में शुद्ध 1500 किलों सोने का इस्तेमाल किया गया है। यह स्वर्ण मंदिर वेल्लोर (तमिलनाडु) के थिरूमलाई कोडी में स्थित है। 100 एकड़ में फैला यह स्वर्ण मंदिर चारों तरफ से हरियाली से घिरा है। जो इस मंदिर को एक अगल रमणीय रूप प्रदान करता है।

इस स्वर्ण मंदिर की संरचना पर अगर ध्यान दिया जाए, तो इसे एक वृताकार रूप में बनाया गया है। यहां दक्षिण भारतीय वास्तुकला का अद्भुत मेल देखा जा सकता है। मंदिर के ठीक बाहरी तरफ एक कृत्रिम सरोवर बनाया गया है। इस सरोवर की खास बात यह है, कि इसमें भारत की मुख्य पावन नदियों का जल मिश्रित है। इस दैविक खासियत की वजह से इस सरोवर को ‘सर्व तीर्थम सरोवर’ का नाम दिया गया है।

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इस मंदिर को बनाने में तकरीबन 300 करोड़ की धनराशि का इस्तेमाल किया गया है। रात में इस मंदिर की स्वर्ण चमक देखने लायक होती है। इस मंदिर को 24 अगस्त 2007 में सार्वजनिक किया गया था। बता दें कि मंदिर के अंदर श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन के लिए आपको क्लाक वाईज घूमते हुए पूर्व दिशा की ओर बढ़ना होगा। दर्शन के बाद आपको फिर पूर्व की ओर बढ़कर दक्षिण दिशा से बाहर होना पड़ेगा। मंदिर के परिसर में एक 27 फीट ऊंची एक दीपमाला स्थापित की गई है। इस दीपमाला की खासियत यह है, कि इसे जलाते ही, पूरा मंदिर स्वर्ण रूप धारण कर, चमकने लगता है। यह दीपमाला देखने में बहुत ही आकर्षक है, जिसका अपना अलग धार्मिक महत्व है।

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