ध्रतराष्ट्र का वो बेटा जिसने भरी सभा में किया था कि द्रौपदी के चीरहरण का विरोध, दुर्योधन और दुशासन को लगाई थी लताड़

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में आगामी 3 मई तक लॉकडाउन है। इस दौरान दूरदर्शन पर लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत का प्रसारण हो रहा है। आज हम आपको बताएंगे धृतराष्ट्र और गांधारी के उस पुत्र के बारे में जिसने नसिर्फ भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण का विरोध किया था, बल्कि महाभारत युद्ध में कौरव सेना की ओर से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की थी, जबकि पाण्डु पुत्र भीम उस धर्माता का वध नहीं करना चाहते थे।

 

धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्रों में से आपने ज्यादातर दुर्योधन और दुशासन का जिक्र होता है। इन 100 कौरवों में से एक कौरव ऐसा था जिसने आजीवन धर्म का साथ दिया। इस कौरव का नाम है – विकर्ण। द्रौपदी चीरहरण के समय भी विकर्ण ने दुर्योधन और दुशासन के कृत्य की निंदा की थी और इस पूरी घटना का विरोध किया था। जब युधिष्ठिर जुए में द्रौपदी को हार गए तो विकर्ण ने उन्हें सभा में लाए जाने का विरोध किया था।

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जिस सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ उसमें धृतराष्ट्र, भीष्म, द्रोणाचार्य, कुलगुरु कृपाचार्य जैसे महारथी थे। लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। इस दुष्कृत्य का विरोध नहीं किया। अकेला विकर्ण ही ऐसा शख्स था जिसने इस घटना का विरोध किया था और दुर्योधन व दुशासन की आलोचना की थी।

अपने भाई दुर्योधन का विरोधी होने के बावजूद विकर्ण ने भाई का धर्म निभाते हुए कौरव सेना का साथ दिया था। युद्ध के दौरान पांडवों का सामना विकर्ण से हुआ लेकिन वह उससे लड़ना नहीं चाहते थे। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब भीम का सामना विकर्ण से हुआ तो भीम ने कहा कि वह उनसे लड़ना नहीं चाहते। विकर्ण ने कहा कि वह जानते हैं कि कौरवों की हार होनी है और वह अपना कर्त्तव्य निभाने के लिए मजबूर हैं।

विकर्ण ने कहा कि द्रौपदी के अपमान के समय सभा में जो उन्हें करना चाहिए था वो उन्होंने किया और यहां रणभूमि में जो उन्हें करना चाहिए, वह कर रहे हैं। भीम और विकर्ण में युद्ध हुआ जिसमें भीम विजयी रहे। भीम को मजबूरन विकर्ण का वध करना पड़ा। कई लोग विकर्ण की तुलना रामायण के पात्र कुंभकर्ण से करते हैं। कुंभकर्ण और विकर्ण दोनों जानते थे कि उनके भाई गलत हैं लेकिन बड़े भाई के निर्देशों का पालने करते हुए उन्होंने अधर्म का साथ दिया।

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