साधुओं के शाप से खाली हो जाता है गांव, जो रुकता है उसकी मौत निश्चित

नई दिल्ली। हमारे देश में बहुत सारी ऐसी परम्पराएं हैं, जिन्हें सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। ऐसी ही एक मान्यता यूपी के महराजगंज जनपद के सिसवा बाजार में है जहां दिन निकलने से पहले ही पूरा गांव खाली हो जाता है और दिन ढलने के साथ ही नियमानुसार पूजा पाठ करने के बाद भी गांव के लोग अपने घरों में वापस जाते हैं।

यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है जिसे आज भी गांव के लोग चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, किसी भी धर्म के हो सभी लोग एक साथ मिलकर इस परंपरा को कायम किए हुए हैं, जिसे लोग परावन के नाम से जानते हैं। महराजगंज के सिसवा बाजार से पश्चिम की तरफ 2 किलोमीटर दूर ग्रामसभा बेलवा चौधरी गांव में पिछले सैकड़ों सालों से यह परंपरा हर तीसरे साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।

यहां सुबह सूर्य निकलने से पहले ही गांव के हर घरों में ताले लग जाते हैं और सभी लोग गांव से बाहर निकल पड़ते हैं और खेतों व बगीचों में अपना पड़ाव डालकर पूरे दिन वहीं रहते हैं। इस दौरान पशुओं को भी लोग अपने साथ रखते हैं। गांव की गलियां पूरी तरह सूनी हो जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

Gyan Dairy

मान्यता के अनुसार सदियों पहले कुछ साधु इस गांव में आए थे। साधुओं की टोली ने ग्रामीणों से खाना बनाने के लिए अविवाहित कन्याओं को भेजने को कहा लेकिन ग्रामीणों ने इंकार कर दिया। ऐसे में साधु फसलों की मड़ाई करने वाली मेह को जलाकर भोजन बनाने लगे। गांव वालों ने जब इसका विरोध किया तो साधुओं ने कहा कि आज के बाद इस गांव में मड़ाई के लिए मेह की जरूरत नहीं पड़ेगी तभी से इस गांव में मड़ाई करते समय बालों को मेह की आवश्यकता नहीं पड़ती है और बैल स्वयं गोल गोल घूमते रहते हैं।

इस के साथ साधुओं ने यह भी कहा कि हर तीसरे साल बुद्ध पूर्णिमा के रोज आप लोग गांव खाली कर दीजिएगा, नहीं खाली करने पर अनहोनी हो सकती है। इसी परंपरा का निर्वहन आज भी गांव के लोग करते चले आ रहे हैं। वहीं कुछ युवा पीढ़ी के लोगों का मानना है कि पहले प्लेग जैसी तमाम बीमारियां होती थी कि गांव का गांव इसकी चपेट में आ जाता था। ऐसे में उन बीमारियों से बचने के लिए गांव खाली करने की परंपरा रही होगी जो आज भी परावन के रूप में जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share