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इस गुफा में छिपा है अकूत खजाना, अंग्रेजों की तोप भी नहीं तोड़ पाई दरवाजा

नई दिल्ली। हमारे देश में कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर अकूत खजाना छिपे होने की चर्चाएं सदियों से चल रही हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश का रहस्य कोई नहीं सुलझा सका है। ऐसा ही रहस्यमयी सोने का भंडार बिहार के राजगीर में एक गुफा के अंदर है।इसके बारे में कहा जाता है कि इसमें मगध साम्राज्य के सम्राट यानी मौर्य शासक बिम्बिसार का बेशकीमती खजाना छुपा है। इस खजाने को आज तक कोई नहीं खोज पाया है। इसे ‘सोन भंडार’ के नाम से जाना जाता है।

दरअसल, एक दौर में मगध की राजधानी था। भगवान बुद्ध ने बिम्बिसार को इसी स्थान पर उपदेश दिया था। इस गुफा से कुछ दूरी पर उस जेल के अवशेष हैं, जहां अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार को बंदी बना कर रखा था।

सोन भंडार गुफा में प्रवेश करते ही पहले एक बड़ा सा कमरा आता है। कहते हैं कि यह कमरा खजाने की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए बनाया गया था। इसी कमरे की पिछली दीवार से खजाने तक पहुंचने का रास्ता बना हुआ है, जिसका द्वार एक पत्थर के दरवाजे से बंद किया हुआ है। इस दरवाजे को आज तक कोई नहीं खोल पाया है।

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गुफा की एक दीवार पर शंख लिपि मे कुछ लिखा हुआ है जो आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। कहा जाता है कि इसमें ही खजाने के दरवाजे को खोलने का तरीका लिखा हुआ है, लेकिन इस लिपि को पढ़ने में दुनियाभर के लोग नाकाम रहे हैं।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बिम्बिसार के खजाने तक पहुंचने का रास्ता वैभवगिरी पर्वत सागर से होकर सप्तपर्णी गुफाओं तक जाता है, जो सोन भंडार गुफा की दूसरी ओर पहुंचती है। कहा जाता है कि अंग्रेजों ने एक बार तोप से खजाने के दरवाजे को तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वो इसे तोड़ नहीं पाए। तोप के गोले के निशान आज भी दरवाजे पर मौजूद हैं।

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