इस गुफा ( Cave) में छिपा है कलयुग की समाप्ति का दिलचस्प रहस्य, जानें खास बातें

नई दिल्ली। भारत के इतिहास में कई पौराणिक मंदिरों और गुफाओं (Cave) का जिक्र मिलता है। ऐसे ही पौराणिक महत्व के मंदिरों में पाताल भुवनेश्वर की गुफा में स्थित मंदिर हैं। हमारे पुराणों में कहा गया है कि पाताल भुवनेश्वर ऐसा स्थान है, जहां चारों धामों के दर्शन एक साथ हो जाता है। इस मंदिर और रहस्यमई गुफा में कई सदियों का इतिहास मिलता है। मान्यता है कि यह ऐसी इकलौती गुफा है जहां हिंदू धर्म के 33 करोड़ देवी-देवता एक साथ निवास करते हैं।

पाताल भुवनेश्वर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के शहर अल्मोड़ा से शेर घाट होते हुए 160 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों के बीच बने कस्बे गंगोलीहाट में स्थित है। पाताल भुवनेश्वर के लिए द्वार के घने जंगलों के बीच कई सारी गुफाएं हैं। इन्हीं में से एक बड़ी गुफा शंकर जी के मंदिर की है।

पुराणों में कहा गया है कि त्रेता युग में सबसे पहले इस गुफा को राजा रितु पूर्ण न देखा था। द्वापर युग में पांडवो ने यहां पर भगवान शंकर के साथ चौपड़ खेला था। कलयुग के जगतगुरु शंकराचार्य का 722 ईसवी के आसपास इस गुफा से साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने यहां तांबे का एक शिवलिंग स्थापित किया। बाद में कुछ राजाओं ने इस गुफा की खोज की। आज के समय में पाताल भुवनेश्वर गुफा आने वाले सैलानियों का एक बड़ा आकर्षण केंद्र बनी हुई है।

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इस गुफा में चारों युगों के प्रतीक रूप से चार पत्थर स्थापित हैं। इनमें से एक पत्थर जैसे कलयुग का प्रतीक माना जाता है। वह धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है यह माना जाता है कि यह कलयुग का प्रतीक पत्थर जब दीवार से टकरा जाएगा। उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा।

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