ये है जहन्नुम का दरवाजा, वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाये रहस्य

नई दिल्ली। धरती पर किसी जगह पर जीवन के लिए गर्मी, सर्दी, हवा, पानी सभी का होना जरूरी है। बहुत ज़्यादा सर्दी या गर्मी होने पर जीवन की संभावना क्षीण हो जाती है। आज हम आपको ऐसी ही एक जगह के बारे में बता रहे हैं जिसे दुनिया का जहन्नुम कहा जाता हैं और इस जगह का नाम है दानाकिल डिप्रेशन। ये वो जगह है जिसकी कोख में धरती की तीन कॉन्टिनेंटल प्लेट आपस में टकराती हैं।

पूर्वी अफ्रीका के इथियोपिया में एक जगह ऐसी है जहां आग बरसती है। इसे दुनिया का सबसे गर्म ठिकाना कहा जाता है। इस जगह का नाम है दानाकिल डिप्रेशन। ये वो इलाक़ा है जिसकी कोख में धरती की तीन कॉन्टिनेंटल प्लेट आपस में टकराती हैं। यहां धरती से लावा और एसिड बाहर आते हैं। दानाकिल डिप्रेशन में साल भर औसत तापमान 45 डिग्री सेल्सियस रहता है। इसे इलाके के लोग इसे ‘जहन्नुम का दरवाजा’ भी कहते हैं। यहां जिंदगी के निशान मिले हैं। ये समुद्र की सतह से करीब 330 फुट नीचे है।

यहां दो ऐसे ज्वालामुखी हैं जो अक्सर सक्रिय रहते हैं। इसमें से एक है ‘इरता अले’। इस ज्वालामुखी की चोटी में लावा खौलता रहता है। आस-पास तेजाब के तालाब हैं। जहां से हर समय भाप उठती रहती है। इस ज्वालामुखी के मुहाने को ‘डालोल’ कहते हैं। समुद्र का खारा पानी जब ज्वालामुखी से निकलने वाले खनिजों और लावा के साथ मिलता है, तो कई तरह के चमकीले रंग पैदा करता है। तेजाब के तालाब में जब सल्फर और नमक एक दूसरे के साथ मिलते हैं तो चमकीला पीला रंग दिखाई देता है। इसी तरह जब ये तांबा नमक के साथ मिलता है तो चमकीला फिरोजी रंग तैयार होता है।

Gyan Dairy

साल 2013 से पहले तक दानाकिल के बारे में दुनिया को बहुत ज्यादा मालूम नहीं था। लेकिन साल 2013 में ‘यूरोप्लांट’ की टीम ने इस इलाके में रिसर्च करना शुरू किया। यूरोप्लांट रिसर्च संस्थाओं और कंपनियों का एक संघ है। जिसका काम धरती के ऐसे इलाकों पर तजुर्बे करना है, जिससे मंगल ग्रह पर रिसर्च करने में मदद मिले। इस बारे रिसर्चर्स का मानना है कि इस इलाके तक पहुंचना आसान काम नहीं है। साल 2012 में यूरोप के कुछ रिसर्चर यहां आए थे, लेकिन उन्हें अगवा कर लिया गया था। यहां तक पहुंचने के लिए इस देश के फौजी साथियों की मदद की दरकार होती है।

इस इलाके की हवा में क्लोरीन और हाईट्रोजन सल्फाइड गैस अधिक मात्रा घुली है। इसीलिए यहां आने वाले रिसर्चर्स को गैस मास्क का सहारा लेकर ही आना पड़ता है। एक रिसर्चर के अनुसार ये पता होना बेहद जरूरी है कि किस जगह पर जमीन के भीतर ज्यादा हलचल मची है। गलती से भी अगर उस जगह पर पैर रख दिया या गिर गए तो जलने से आपको कोई नहीं बचा सकता।

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