UA-128663252-1

इस शहर में मरना है, जानें हैरान करने वाला रहस्य

नई दिल्ली। यह यथार्थ सत्य है कि इस धरती पर जिसने जन्म लिया है उसका मरना तय है। कहते है जिसकी मौत जहां लिखी होती है वह उसी जगह जाकर मरता है। लेकिन इस दुनिया में एक ऐसी भी जगह है, जहां मरना मना है। सुनने में आपको भले ही अजीब लगे लेकिन ये सच है।

नार्वे का लॉन्गेयरबेन शहर अपनी कई खासियतों के चलते दुनियभर में मशहूर है। दुनिया के सबसे उत्तरी छोर पर बसे इस शहर की आबादी 2000 के आस-पास है। स्वाबलार्ड आइलैंड का ये अकेला ऐसा शहर है जहां पर जमने वाली ठंड के बावजूद लोग रहते हैं। यहां माइनस टेम्परेचर में जिंदगी जितनी मुश्किल है, उतना ही मुश्किल पोलर बीयर से निपटना है। सबसे खास बात तो ये है कि यहां मरने की इजाजत नहीं है।

लॉन्गेयर के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस आर्कटिक टाउन की तलाश अमेरिकी जॉन लॉन्गेयर ने की थी। 1906 में यहां उन्होंने आर्कटिक कोल कंपनी शुरू की और माइनिंग ऑपरेशन के लिए 500 लोग लाए गए। लॉन्गेयर एक कंपनी टाउन था, लेकिन 1990 तक यहां से ज्यादातर माइनिंग ऑपरेशन स्वियाग्रूवा शिफ्ट हो गए। अब ये टाउन एक बड़ा टूरिस्ट प्वाइंट बन गया है। यहां रिसर्च का काम भी किया जा रहा है। यहां साल में चार महीने सूरज नहीं निकलता और 24 घंटे रात रहती है।

Gyan Dairy

यहां सडक़ों के कोई नाम नहीं हैं और इन्हें नंबर्स से जाना जाता है। ट्रांसपोर्टेशन के लिए यहां सिर्फ स्नो स्कूटर का इस्तेमाल होता है। अगर यहां कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए या मौत के करीब हो, तो उसे आखिरी दिनों के लिए प्लेन या शिप की मदद से नॉर्वे के दूसरे हिस्सों में भेज दिया जाता है। वजह यह है कि शहर में एक बहुत ही छोटा कब्रिस्तान है। पिछले 70 साल में यहां तब से कोई भी दफनाया नहीं गया, जब से पता चला कि पहले दफनाई गईं लाशें अब तक जमीन में घुल भी नहीं पाई हैं। जमने वाली ठंड के चलते लाशें यहां खराब ही नहीं होतीं।

साइंटिस्ट्स ने कुछ साल पहले यहां एक डेडबॉडी के टिशू सैम्पल के तौर पर लिए थे, जिसमें अब भी इन्फ्लुएंजा के वायरस मिले। इसके चलते यहां नो डेथ पॉलिसी लागू कर दी गई है। सबको राइफल रखना जरूरी है। यहां हर वक्त पोलर बीयर का खतरा रहता है। इनसे निपटने के लिए सभी को हाई पावर राइफल (बंदूक) रखना जरूरी है। यहां पोलर बीयर की आबादी 3000 के करीब है। इनके डर से घर से बाहर हर शख्स आपको राइफल के साथ नजर आएगा।

Share