जानिये, किस तरह के लोग लाशों से भी सेक्स करने के आदी होते हैं और क्यों

दो दिन पहले ही गाजियाबाद की सीबीआई की विशेष अदालत ने प्रदेश के अत्यंत चर्चित लोमहर्षक निठारी कांड के अभियुक्तों सुरेद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी की सजा सुनाई है। इन दोनों में सुरेंद्र कोली जैसे जघन्य अपराधी को साइको किलर माना जाता  है। मनोचिकित्सा विज्ञान में ऐसे लोग नेक्रोफीलिया नामक बीमारी से पीडित होते हैं। ये अल्पवयस्त बच्चों के साथ दुराचार करने के बाद उनकी हत्या कर दिया करते हैं। इतना ही नहीं, हत्या करने के वाद ऐसे लोग मृतक बच्ची की लाश के साथ भी सेक्स करने के आदी होते हैं। सुरेद्र कोली इस बीमारी से पीडित रहा है। यह बीमारी दस लाख में से किसी एक व्यक्ति को ही  होती है। भारत में कितने लोगों को यह बीमारी है? इस बारे में अभी तक कोई प्रामाणिक आकडा नहीं उपलब्ध हो सका है।

सुरेद्र कोली के अलावा अभी तक इस बीमारी से पीडित एक और व्यक्ति के बारे में पता चल सका है। यह भी सीरियल रेपिस्ट किलर रहा है। इसका नाम था रविंदर। दिल्ली पुलिस ने जुलाई, 2015 में इसे दबोचा था। इस वयक्ति का दावा रहा है कि उसने लगभग 40 अल्पवयस्क बच्चियों के साथ दुराचार किया था। ये सभी 14 साल से कम उम्र की थीं। इनमें से 32 की लाशों के साथ भी उसने दुष्कर्म किया था। यह बदायूं का मूल निवासी था। पुलिस को दिये गये अपने बयान में इसका कहना था कि दस साल की उम्र में उसके साथ भी दो लेागों ने यह दुष्कर्म किया था। उसी के बाद से ही उसने भी यही काम करना शुरू कर दिया था।

इस संबंध में लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जिरियाॅट्रिक एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग के एचडीओ डा0 डीसी तिवारी की माने, तो नेक्रोफीलिया एक प्रकार की अत्यंत दुर्लभ मानसिक बीमारी है। इस बीमारी के बारे में अभी तक ज्यादा कुछ नहीं पता चल सका है। इसे लेकर अभी भी शोधकार्य जारी है। दस लाख लोगों में बमुश्किल किसी एक को ही यह बीमारी होती है। इससे पीडित लोग लाशों के साथ भी सेक्स करने के आदी होते हैं। इसके लिये ऐसे लोगों को एक खास किस्म की सनक होती है। इसी के चलते इन्हें नहीं पता चल पाता है  िक वे इतना जघन्य कार्य कर रहे हैं।

Gyan Dairy

सुरेंद्र कोली के संबंध में  मिली जानकारी में यह भी कहा गया है कि पहले उसे यह बीमारी नहीं थी। लेकिन, मोनिंदर पंढेर की कोठी में पैसे की खातिर अपना जिस्म बेचने के लिये आने वाली युवतियों के साथ जब उसकी भी इच्छा सेक्स करने की होती थी, तो वे इसे पंढेर का नौकर समझकर दुत्कार दिया करती थी। इसका उस पर बडा प्रतिकूल असर पडा। लिहाजा, वह इस बीमारी से पीडित हो गया। सेक्स की इच्छा से अल्पवयस्क बच्चों के प्रति उसका आकर्षण बढने लगा। इसके बाद पंढेर की कोठी से होकर गुजरने वाली बच्चियों को बहला फुसलाकर अथवा जबरन वह उनके साथ अपने शारीरिक संबंध बनाने लगा। इस काम को करने के बाद वह उनकी हत्या कर दिया करता था। सनक चढ जाने पर वह उनकी लाशों के साथ भी दुष्कर्म किया करता था।

सुरेंद्र कोली के एक बेहद करीबी सूत्र ने‘इंडिया संवाद‘को बताया कि कोली ने अपनी 17 साल की आयु में पहली बार यह दुष्कर्म किया था। इसके बाद उसकी आदत बडी तेजी से खराब होती चली गयी। वह दुराचार करने के बाद बच्चियों की हत्या करना नहीं भूलता था। यदि किसी बच्ची ने यह कह दिया कि वइ इस बात की शिकायत अपनी मां से कर देगी, तो उसकी बडी बुरी मौत होती थी। यह काम वह प्रायः शराब के नशे में धुत होने के बाद ही किया करता था।

Share