जब 24000 फीट की उंचाई पर उड़ गई प्लेन की छत, जानें फिर क्या हुआ

नई दिल्ली। आज के दौर में कहीं बाहर जाने पर हम सब हवाई यात्रा को अहमियत देते हैं। हवाई जहाज पर चढ़ने वालों को बार-बार बताया जाता है कि आसमान में हवा का दबाव बढ़ जाता है और तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। ऐसे में अगर 24 हजार फीट की ऊंचाई पर एक प्लेन की छत उखड़कर उड़ जाए तो फिर क्या होगा। लेकिन एक बार ऐसा हुआ था।

दरअसल, अमेरिका के हवाई प्रांत में हिलो एयरपोर्ट से होनोलुलु के लिए एलोहा एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या 243 ने 28 अप्रैल, 1988 को उड़ान भरी थी। विमान में 90 यात्री और 5 क्रू मेंबर समेत कुल 95 लोग सवार थे। ये फ्लाइट इस उड़ान से पहले दिन में तीन रिटर्न उड़ान भर चुकी थी लेकिन कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई।

50 मिनट के इस हवाई सफर के लिए बोइंग 737-297 फ्लाइट हिलो के लोकल समय से दोपहर 1.25 बजे उड़ी और करीब 1.48 बजे वो 24 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी जब अचानक एक धमाकेदार आवाज के साथ फ्लाइट की छत उड़ गई। फ्लाइट में यात्रियों को चाय-नाश्ता दे रही एयरहोस्टेस क्लाराबेली लैनस्गिं हवा में उड़ गईं। इसके बाद वो कभी बरामद नहीं हुईं। फ्लाइट में हवा का दबाव इतना ज्यादा था कि विमान की 18 फीट से ज्यादा छत हवा में ही उड़ गई।

इस विमान के पायलट कैप्टन रॉबर्ट स्कॉर्न्सथीमर थे, जिन्हें 8500 घंटे जहाज उड़ाने का अनुभव था। इसमें 6700 घंटे का अनुभव बोइंग 737 उड़ाने का ही था। उनके साथ को-पायलट सीट पर मैडलीन टॉम्पकिन्स थीं। मैडलीन को 8000 घंटे की उड़ान का अनुभव था जिसमें 3500 घंटे बोइंग 737 के थे। पायलट टीम को उस विमान को उड़ाने का बहुत बढ़िया अनुभव था। यही अनुभव विमान में बचे 94 लोगों के काम आया।

प्लेन की छत जब पहली बार उखड़ी तब मैडलीन फ्लाइट उड़ा रही थीं लेकिन इसके तुरंत बाद रॉबर्ट ने कमान संभाल ली और दोनों ने फ्लाइट को 13 मिनट के अंदर करीब 1.58 बजे सबसे पास के मॉई आइलैंड के कहुलुई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंड करा दिया। लैंडिंग सेफ रही और लैंडिंग के तुरंत बाद पायलट ने सारे यात्रियों को इमरजेंसी तरीके से बाहर निकाला।

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विमान पर सवार 95 में 94 यात्री बाल-बाल बच गए। इस भयानक हादसे में मात्र एक की जान गई और वो एयरहोस्टेस क्लाराबेली थीं। उनके अलावा विमान पर सवार 65 लोग घायल तो हुए लेकिन उनकी जान बच गई। 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। जिस एयरपोर्ट पर विमान उतारा गया वो एयरपोर्ट इस तरह के हादसे के लिए तैयार नहीं था इसलिए यात्रियों को अस्पताल ले जाने में परेशानी हुई।

हादसा करीब 15 मिनट का था लेकिन ये 15 मिनट फ्लाइट पर सवार यात्रियों के लिए बेहद खौफनाक थे। एक यात्री गेल यामामोटो ने जांच के दौरान बताया कि उन्होंने फ्लाइट में चढ़ते वक्त ही दरार देखा था लेकिन इसके बारे में किसी को बताया नहीं।

हादसे की जांच के बाद अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने एलोहा एयरलाइंस को इसके लिए दोषी पाया जिसने 19 साल पुराने विमान की ठीक से जांच-परख के बिना उसे उड़ाने की इजाजत दी। जांच में विमान मैंटेंनेंस टीम को इसके लिए दोषी ठहराया गया।

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