किन्नरों का ये अनोखा वाकया देखकर आप भी रह जाएंगे दंग

रायपुर। 19 जुलाई 2016 को ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल 2016 को मंजूरी मिलने के बाद किन्नरों को अपने हक़ के लिए समाज में अपनी एक अलग पहचान और मुक़ाम दिया जाने लगा। जिसके बाद से अब वो खुलकर सामने आ चुके हैं , और वो इस समाज में अपना सामाजिक जीवन, शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में आजादी से रह रहें हैं। वहीं हाल ही में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शनिवार को किन्नरों की अनोखी शादी देखने को मिली।

दरअसल, इस अनोखी शादी में 15 किन्नर एक-साथ शादी कर अपने पारिवारिक जीवन की शुरूआत कर रहे हैं। शहर के पचपेड़ी नाका क्षेत्र के पुजारी पार्क में स्थित विवाह भवन में किन्नरों के कई जोड़ों की शादियां हुई हैं। किन्नर जिनसे सामाजिक रूप से बहिष्कृत जैसा व्यवहार किया जाता है, वह आज अपनी शादी को लेकर खुश हैं और उनकी आंखों में भविष्य को लेकर कई सपने हैं।

सलोनी अंसारी बताती हैं कि लगभग आठ साल पहले वह गुलाम नबी से मिली थी। मुलाकात दोस्ती में बदली और यह दोस्ती कब प्रेम में बदल गया पता ही नहीं चला, लेकिन इस दौरान उन्हें अपने परिवार और समाज की बेरूखी का भी सामना करना पड़ा।

वधू के पारंपरिक परिधान में सजी-धजी सलोनी कहती है कि ‘कहते हैं किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश करती है।’ शाहरूख खान की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के इस डायलाग के बाद सलोनी खिलखिला उठती है। इस बहिष्कार समाज में गुलाम नबी ने सलोनी का साथ दिया।

पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से नागपुर शहर के रहने वाले सलोनी और गुलाम बताते हैं कि पहले उन्होंने सोचा कि इस संबंध को छुपाकर रखा जाए। लेकिन जब उन्होंने हिम्मत कर इसकी जानकारी अपने परिवार वालों को दी तब वह इसके खिलाफ हो गए।

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बता दें, वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने किन्नरों को तृतीय लिंग के रूप में मान्यता दी और उनके लिए संवैधानिक अधिकार और स्वतंत्रता सुनिश्चित की तब उन्होंने साथ रहने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने अपने घरों को छोड़ दिया। बाद में जब उन्हें रायपुर के इस कार्यक्रम के बारे में सुना तब तुरंत आयोजकों से संपर्क कर इस आयोजन में शादी रचाई।

सलोनी का कहना है कि अब वो अक्सर त्योहारों और अन्य अवसरों के दौरान वह अपने परिवार वालों से मिलते रहते हैं। उनका कहना है कि परिवार को इस रिश्ते के बारे में समझाना बहुत मुश्किल था कि अन्य व्यक्तियों की तरह एक किन्नर भी प्यार चाहता है और विवाहित जीवन जीने का अधिकार रखता है।अब उनके परिवार के लोग इस बात को समझ चुके हैं।

इस कार्यक्रम में मौजूद 15 किन्नरों की अपनी एक अलग-अलग कहानी है। अब वे सभी लोग इस शादी के कार्यक्रम से खुश हैं। जहां उन्हें अपनी ज़िंदगी की एक नई शुरुआत करने का मौका मिला।

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