केयर इकोनॉमी से यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों की देखभाल को अब संगठित सेवा क्षेत्र से जोड़कर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा का नया आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई।nnराज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधारnnसमाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों व वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। कुशल केयरगिवर्स तैयार करने, उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, समावेशी और टिकाऊ केयर इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है। कार्यशाला व्यापक ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगी।nn12 विभाग मिलकर तय करेंगे आगे की रणनीतिnnकार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भागीदारी की। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की योजनाओं और संसाधनों को एक साझा रणनीति से जोड़कर केयर सेक्टर को व्यवस्थित रूप देना है। इससे देखभाल के पारंपरिक और अनौपचारिक कार्य को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में पहचान देने की दिशा में काम होगा।nn4 प्रमुख स्तंभों पर हुआ मंथनnnकार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष चर्चा हुई। पहला, घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्यांकन कर उसे पहचान और उचित मूल्य देना। दूसरा, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना। तीसरा, केयर वर्कफोर्स के लिए मानक प्रशिक्षण, प्रमाणन और टिकाऊ रोजगार की व्यवस्था करना। चौथा, सेवाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए पीपीपी मॉडल, बीमा योजनाओं और सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाएं तलाशना।nnकेयरगिवर्स को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने पर जोरnnसमाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने केयर इकोनॉमी को सामाजिक जरूरत के साथ-साथ रोजगार का उभरता हुआ क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए विभागीय समन्वय जरूरी है। प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स तैयार होने से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी और युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रशिक्षण, प्रमाणन और रोजगार की पूरी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।nnकार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह समेत वित्त, कौशल विकास, स्वास्थ्य और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button