बाढ़ से पहले अलर्ट होगी काशी: 3-डी डिजिटल ट्विन तकनीक बताएगी कौन से इलाके होंगे प्रभावित

वाराणसी : बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए योगी सरकार ने तकनीक को राहत और बचाव की रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। काशी में तैयार किए गए ‘3-डी अर्बन स्पेशियल डिजिटल ट्विन’ तकनीक की मदद से बाढ़ के संभावित प्रभाव का पहले ही आकलन किया जा रहा है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में कौन-कौन से इलाके प्रभावित हो सकते हैं, किन स्थानों पर पानी भरने की आशंका है और कितने घर इसकी चपेट में आ सकते हैं, इसकी जानकारी तकनीक के माध्यम से पहले से प्राप्त की जा रही है। इसी आधार पर प्रशासन समय रहते राहत और बचाव की रणनीति तैयार कर रहा है।

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अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानंद गुप्ता ने बताया कि 3-डी डिजिटल ट्विन और जीआईएस तकनीक से संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूर्व आकलन कर प्रशासन पहले से रणनीति तैयार कर रहा है। इसी तकनीक से प्राप्त जानकारी के आधार पर राहत-बचाव कार्यों की योजना और संसाधनों की तैनाती को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

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वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक अमरेंद्र तिवारी के अनुसार, काशी के लगभग 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की थ्री-डी मैपिंग की गई है। इसमें 100 से अधिक थीमैटिक लेयर शामिल हैं। लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग ( लिडार ) तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए इस डिजिटल मॉडल से क्षेत्र की विस्तृत और वास्तविक समय के अनुरूप जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है। बाढ़ के दौरान पानी में डूबने वाले क्षेत्रों, स्थानों और प्रभावित होने वाले घरों की संख्या का भी पूर्व आकलन किया जा सकता है। इससे प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पहले से तैयारी करने और जरूरत के अनुसार संसाधनों की तैनाती करने में मदद मिलती है।

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स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. संतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस डिजिटल मॉडल को तैयार करने के लिए लाइट एयरक्राफ्ट के साथ बैग पैक और वाहनों के माध्यम से भी थ्री-डी जीआईएस मैपिंग की गई है। काशी की गलियों से लेकर प्रमुख सड़कों और अन्य क्षेत्रों तक का डेटा एकत्र कर डिजिटल स्वरूप में तैयार किया गया है। इसके आधार पर विकसित कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग विकास कार्यों की योजना बनाने वाले विभागों और एजेंसियों द्वारा किया जा सकता है। तकनीक आधारित यह पहल न केवल आपदा प्रबंधन को मजबूत कर रही है, बल्कि काशी के भविष्य के शहरी विकास के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

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