सीखते कदम, बढ़ती दक्षता: मिशन कर्मयोगी से संवरेगा शिक्षा विभाग का कार्यबल

लखनऊ। योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था के साथ उसे गति देने वाले मानव संसाधन को भी दक्ष और सक्षम बनाने की नीति पर आगे बढ़ रही है। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्मिकों का निरंतर क्षमता विकास अब कार्यसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। इसी क्रम में मिशन कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को न्यूनतम दो कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से जिन कार्मिकों ने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अपूर्ण हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण पूरा कराने को कहा गया है।nnमहानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार कार्यालयाध्यक्ष स्वयं भी कोर्स पूरा करेंगे और अपने अधीनस्थ कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इस व्यवस्था से विभागीय प्रशिक्षण को केवल उच्च कार्यालयों तक सीमित रखने के स्थान पर विद्यालय स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।nnज्ञात हो कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण की यह व्यवस्था शिक्षा विभाग के कार्मिकों में नई दक्षताओं, कार्यकुशलता और निरंतर सीखने की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है।nnदक्षता के विविध आयामों पर प्रशिक्षणnnराज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) के निदेशक एवं मिशन कर्मयोगी के बेसिक शिक्षा के नोडल डॉ. मुकेश चंद्र बताते हैं कि कार्मिकों की सुविधा के लिए छह कोर्स चयनित कर उन्हें साझा किए गए हैं। इनमें ‘स्क्रीन टाइम प्रबंधन एवं डिजिटल जीवनशैली’, ‘इंग्लिश वोकैबुलरी: कॉमनली मिसयूज्ड एंड कन्फ्यूज्ड वर्ड्स’, ‘पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए प्रभावी शिक्षण विधियां’, ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’, ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ और ‘बेसिक्स ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट’ शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के चयन में डिजिटल जीवनशैली, प्रभावी शिक्षण, तनाव प्रबंधन और कार्यस्थल से जुड़ी दक्षताओं जैसे अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया है। इससे कार्मिकों को अपनी भूमिका के अनुरूप नई जानकारी और कार्य-कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।nnअधूरे प्रशिक्षण को पूरा कराने पर विशेष जोरnnनिर्देशों के अनुसार ऐसे कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने अभी तक कोई कोर्स पूर्ण नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अपूर्ण हैं। कार्यालयाध्यक्षों को इनके प्रशिक्षण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। योगी सरकार की इस कार्यसंस्कृति में सीखना, बेहतर कार्यान्वयन की आधारभूमि के रूप में देखा जा रहा है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट करने का अवसर मिल रहा है।nnकार्यालय से विद्यालय तक पहुंचेगा क्षमता विकासnnनिर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण संबंधी संदेश को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने के साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे विभागीय कार्यालयों से लेकर विद्यालयों तक कार्यरत मानव संसाधन को एक साझा क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी।nnयोगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ उसके मानव संसाधन की दक्षता और क्षमता बढ़ाने को भी प्राथमिकता दे रही है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को निरंतर सीखने और अपने कार्य-कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। दक्ष और संवेदनशील मानव संसाधन ही सरकार की शिक्षा नीतियों को प्रभावी रूप से धरातल तक पहुंचाने की शक्ति बनता है।nसंदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)nnमिशन कर्मयोगी के माध्यम से विभागीय कार्मिकों के सतत क्षमता विकास को गति दी जा रही है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक कार्मिक निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करे और सीखने की इस प्रक्रिया को अपने कार्य से जोड़े। विशेष रूप से अपूर्ण अथवा अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले कार्मिकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।nमोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

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