PM मोदी से मुलाकात के बाद सुखबीर बादल का बड़ा ऐलान: परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को अकाली दल का समर्थन

नई दिल्ली/चंडीगढ़: राष्ट्रीय राजनीति और पंजाब के सियासी गलियारों में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई महत्वपूर्ण मुलाकात के ठीक एक दिन बाद, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) और महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Act) को अपनी पार्टी की ओर से औपचारिक समर्थन देने का फैसला किया है। इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद न केवल संसद के आगामी सत्र के विधायी समीकरण बदल गए हैं, बल्कि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के दो दशक पुराने ऐतिहासिक गठबंधन की वापसी की अटकलें भी तेज हो गई हैं। साल 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग हुए अकाली दल का यह कदम राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर एक नई राजनीतिक दिशा का संकेत दे रहा है।

पीएम मोदी से मुलाकात और परिसीमन बिल पर अकाली दल की सहमति

शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों शीर्ष नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हालातों पर काफी देर तक चर्चा हुई। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने साफ किया कि अकाली दल ने संसदीय मुद्दों और देश हित से जुड़े कानूनों पर विचार-विमर्श करने के बाद परिसीमन प्रक्रिया को अपना समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों के लिए संसदीय सीटों में 50 प्रतिशत तक की आनुपातिक बढ़ोतरी का जो फॉर्मूला सुझाया गया है, वह व्यावहारिक और न्यायसंगत प्रतीत होता है। इस फॉर्मूले से देश के किसी भी राज्य का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा और परिसीमन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सकेगी।

महिला आरक्षण और निष्पक्ष परिसीमन की मांग पर अकाली दल का रुख

परिसीमन के साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत प्रभाव से लागू करने की मांग दोहराई है। सुखबीर बादल ने याद दिलाया कि सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने बहुत पहले ही अपने धार्मिक और सामाजिक प्रशासनिक निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करके देश के सामने एक मिसाल कायम की थी। इसलिए अकाली दल महिला सशक्तिकरण के इस राष्ट्रीय कदम का पूरी तरह स्वागत करता है। हालांकि, उन्होंने यह शर्त भी रखी कि परिसीमन और आरक्षण व्यवस्था लागू करते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे और पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों के हितों की रक्षा हो सके।

कृषि कानूनों से गठबंधन टूटने के बाद क्या 2027 चुनाव में फिर एक होंगे पुराने साथी?

भाजपा और अकाली दल का गठबंधन 1997 से 2020 तक पंजाब की राजनीति की रीढ़ माना जाता रहा है। इस गठबंधन ने 1997, 2007 और 2012 में पंजाब में पूर्ण बहुमत के साथ सरकारें बनाईं। हालांकि, साल 2020 में केंद्र के कृषि सुधार कानूनों को लेकर उपजे भारी विरोध के कारण अकाली दल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था और एनडीए से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे। इसके बाद हुए 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, जिसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी (AAP) को मिला और उसने प्रचंड बहुमत से राज्य में सरकार बनाई। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदले हुए वैश्विक और प्रांतीय परिस्थितियों में दोनों दलों को एक-दूसरे की जरूरत महसूस होने लगी है। अकाली दल के पास पंजाब का मजबूत ग्रामीण और सिख वोटर बेस है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का शहरी और कारोबारी मतदाताओं के बीच दबदबा है।

राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए और पंजाब के सियासी समीकरणों पर असर

संसद में अकाली दल के इस कदम से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। विपक्षी खेमा, विशेषकर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन, परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था। ऐसे समय में अकाली दल जैसी क्षेत्रीय और कैडर आधारित पार्टी का समर्थन मिलना केंद्र सरकार की विधायी रणनीति के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि यह कदम पहले से तय राजनीतिक पटकथा का हिस्सा है और भाजपा तथा अकाली दल पर्दे के पीछे से एक हो रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर पंजाब भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि प्रधानमंत्री देश के अभिभावक हैं और किसी भी राज्य के विकास के लिए किसी भी क्षेत्रीय नेता की प्रधानमंत्री से मुलाकात सामान्य बात है। बहरहाल, सुखबीर बादल के इस बड़े कदम ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है।

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