हरियाणा में धान खरीद और राइस मिलर्स का बड़ा विवाद: एजेंसियों की सुस्ती से 433 मिलें डिफल्टर

हरियाणा में धान खरीद और राइस मिलर्स का बड़ा विवाद: एजेंसियों की सुस्ती से 433 मिलें डिफल्टर

करनाल: धान की सरकारी खरीद और चावल की डिलीवरी को लेकर हरियाणा में राइस मिलर्स और सरकारी एजैंसियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मिलर्स का आरोप है कि पिछले सीजन का चावल मिलों में पड़ा हुआ है लेकिन भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) और संबंधित एजेंसियां इसे उठाने में देरी कर रही हैं। इसके चलते प्रदेश के 433 राइस मिल डिफाल्टर हो गए हैं जबकि करनाल जिले की 100 से अधिक मिलों को इस सीजन में धान अलॉट नहीं किया गया।

इस मामले को लेकर जिला राइस मिल चेयरमैन नरेश बंसल, उप-प्रधान राजिंदर मोंगा, सौरव गुप्ता सहित अन्य मिलर्स ने अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि सरकार और चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत देकर मामले मेंहस्तक्षेप की मांग की गई है। मिलर्स के अनुसार पिछले सीजन में चावल की डिलीवरी में देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि इसकी प्रमुख वजह एजेंसियों द्वारा चावल का उठान नहीं करना और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल समय पर उपलब्ध नहीं करवाना है।

रात में विभागीय कार्रवाई का मुद्दा भी उठायामिलर्स ने बताय कि वर्ष 2025-26 के सीजन में केंद्र सरकार ने 54 लाख मीट्रिकटन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन हरियाणा में इससे अधिक धान की सरकारी खरीद हुई। उन्होंने कहा कि 4 लाख मीट्रिकटन चावल की डिलीवरी लेने की अनुमति मिली थी लेकिन करीब 2.55 लाख मीट्रिक टन चावल अव भी मिलों में पड़ा है। इस दौरान भगवती राइस मिल में हुई विभागीय कार्रवाई का मुद्दा भी उताया गया।मिलर्स का दावा है कि विभाग ने दिन में 2 राइस मिलों की जांच की थी, जहां स्टॉक पूरा मिला। इसके बवजूद रात के समय भगवती राइस मिल में कार्रवाई की गई। आरोप है कि मिल मलिक पर दबाव बनाकर करीब 5.50 करोड़ रुपए का चैक लिया गया। यह मामला करनाल मै चर्चा का विषय बना हुआ है। मिलर्स ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्टॉक की जांच दिन मे भी की जा सकती थी।मिलर्स का कहना है कि रात में कार्रवाई से कारोबारियों पर दबाव बनता है और राइस मिलिंग कारोबार की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि पहले शत-प्रतिशत चावल डिलीवरी पूरी करने वाले मिली को धान अलॉट किया गया, जिसके बाद ४० प्रतिशत डिलीवरी पूरी करने वाले मिलर्स को भी अलॉटमेंट देने की व्यवस्था की गई। मिलर्स ने मांग की कि चावल का उठान तेज किया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान कर धान अलॉट मैट में राहत दी जाए।
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