
लखनऊ। यूजीसी के नए नियम और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसको लेकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके पीछे की नए UGC नियमों से गहरे मतभेद का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। जेल में डिप्टी जेलर ने एक ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला। अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के शिष्यों को बुरी तरह पीटा गया। दूसरा मुद्दा UGC 2026 का नियम है। इसके बाद देर रात उन्होंने डीएम आवास में बंधक बनाने का आरोप लगाया। इसी बीच, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया। उन्हें शामली कलेक्टर ऑफिस से अटैच किया गया है। मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है।
ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाने का आरोप
बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। अग्निहोत्री ने हाल की घटनाओं का उल्लेख किया, जिसमें एक डिप्टी जेलर द्वारा ब्राह्मण को पीटना और एक पुलिस स्टेशन में एक दिव्यांग ब्राह्मण की पीट-पीटकर हत्या करना शामिल है। उन्होंने माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिर मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज और उनके शिष्यों के साथ हुई मारपीट की घटना का भी जिक्र किया।
अपशब्द बोलने का लगाया आरोप
सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि डीएम ने वार्ता के लिए बुलाया था। आरोप लगाया कि वह डीएम आवास पर 45 मिनट तक बंधक रहे। कहा कि मैंने सचिव दीपक पांडेय को फोन किया कहा कि मुझे बंधक बनाकर रखा हुआ है। जब मैंने इनको कॉल कर दिया, डीएम और एसएसपी साहब को बता दिया तब तुरंत छोड़ दिया गया।
आरोपों को जिलाधिकारी ने सिरे से किया खारिज
उधर, बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा डीएम आवास पर कथित रूप से बंधक बनाए जाने के आरोपों को जिलाधिकारी ने सिरे से खारिज कर दिया है। डीएम अविनाश सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि यह आरोप तथ्यहीन और भ्रामक हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है।



