
उज्जैन: गंभीर डैम में बचा सिर्फ 27 प्रतिशत पानी, नर्मदा जल पर 365 करोड़ खर्च
महाकाल की नगरी उज्जैन में पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। शहर की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत गंभीर डैम में पानी का स्तर लगातार घट रहा है। 2,250 एमसीएफटी क्षमता वाले डैम में अब सिर्फ 612.580 एमसीएफटी पानी शेष है, जो इसकी कुल क्षमता का करीब 27 प्रतिशत है। दूसरी ओर नर्मदा का पानी उज्जैन तक लाने के लिए अब तक 365 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। ऐसे में गंभीर डैम का घटता जलस्तर जल प्रबंधन और पानी के उपयोग को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
आठ दिन में 14.872 एमसीएफटी पानी कमगंभीर डैम के आंकड़ों के अनुसार 16 अक्टूबर को जलस्तर 627.452 एमसीएफटी था। 23 अक्टूबर को यह घटकर 614.439 एमसीएफटी रह गया, जबकि 24 अक्टूबर को डैम में केवल 612.580 एमसीएफटी पानी दर्ज किया गया। इस तरह आठ दिनों में जलस्तर में कुल 14.872 एमसीएफटी की गिरावट आई। लगातार घटते जलस्तर ने आने वाले गर्मी के महीनों में पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि पानी की खपत और डैम से निकासी की यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में उज्जैन को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार गंभीर डैम के पानी का उपयोग पेयजल के अलावा सिंचाई और अन्य कार्यों में भी हो रहा है। ऐसे में यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि नर्मदा जल की आपूर्ति के बावजूद डैम का जलस्तर क्यों घट रहा है और पानी का उपयोग किस तरह किया जा रहा है।
नर्मदा जल का बिल 365 करोड़ रुपये के पारलोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के अनुसार अगस्त 2026 तक नर्मदा जल का बिल 365 करोड़ 54 लाख 20 हजार 570 रुपये हो चुका है। यह पिछले तीन से चार वर्षों के खर्च से संबंधित बताया गया है। इसमें सितंबर और अक्टूबर का बिल जुड़ने के बाद कुल राशि और बढ़ सकती है।
नर्मदा जल परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गंभीर डैम का जलस्तर लगातार गिरना जल प्रबंधन की समीक्षा की जरूरत को सामने लाता है। हालांकि नर्मदा जल पर हुए खर्च और गंभीर डैम के घटते जलस्तर के बीच संबंध को स्पष्ट करने के लिए पानी की आपूर्ति, खपत और निकासी के आंकड़ों का विस्तृत आकलन जरूरी है।
रिजर्व करने की तैयारीबताया जा रहा है कि पीएचई विभाग गंभीर डैम में बचे पानी को पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखने की तैयारी कर रहा है। हालांकि इस संबंध में प्रशासन का अंतिम आदेश अभी आना बाकी है। यदि डैम के पानी को केवल पेयजल के लिए आरक्षित किया जाता है तो सिंचाई और अन्य उपयोगों पर नियंत्रण करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने शहर की आगामी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी का संतुलित प्रबंधन करने की चुनौती होगी।
उज्जैन में गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट से बचने के लिए गंभीर डैम के जलस्तर, नर्मदा जल की आपूर्ति और पानी की खपत की नियमित समीक्षा जरूरी है। अब निगाहें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि डैम में बचे पानी को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com



