
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपी आशीष मिश्रा उर्फ मोनू को दिवाली के दौरान अपने गृह नगर जाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने उन्हें परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ त्योहार मनाने के लिए लखीमपुर खीरी जाने की छूट दी है। यह अनुमति पहले से तय शर्तों के अधीन होगी।
आशीष मिश्रा 2021 में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। हालांकि, जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अपने गृह नगर जाने की अनुमति नहीं थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने त्योहार के मद्देनजर उन्हें सीमित राहत दी है।
सुनवाई में जज के तबादले का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने संबंधित जज के तबादले को सकारात्मक कदम बताया। वहीं, आशीष मिश्रा के वकील ने इसे सामान्य तबादला बताया।
इससे पहले प्रशांत भूषण ने निचली अदालत के जज के रवैये पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि एक चश्मदीद गवाह ने बीमारी का प्रमाण पत्र दिया था, इसके बावजूद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। प्रशांत भूषण ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए जज बदलने की मांग भी की थी।
131 गवाहों में 90 के बयान दर्ज
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले में कुल 131 गवाह हैं और अब तक 90 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जज के कामकाज को लेकर उठाए गए सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद मामले की सुनवाई कर रहे जज का तबादला हुआ।
अदालत ने आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की अनुमति देते हुए पहले से लागू शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया है। उन्हें निर्धारित तारीख तक वापस लौटना होगा।



