
हरियाणा में अफसरशाही में बड़े फेरबदल की आहट…
हरियाणा में प्रशासनिक नेतृत्व के शीर्ष स्तर पर संभावित बदलावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से लेकर मुख्य सचिवालय तक महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव का पद खाली होने और मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा होने के चलते प्रशासनिक फेरबदल की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच प्रदेश सरकार ने केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को वापस बुलाने के लिए केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को पत्र लिखा है।सरकार की इस पहल को प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ाने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के प्रभावी वितरण के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सीएमओ में नई नियुक्ति से लेकर मुख्य सचिव के उत्तराधिकारी के चयन तक कई अहम पदों पर संभावित नामों को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि, किसी भी नियुक्ति या फेरबदल को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।मुख्य सचिव की कुर्सी पर किसकी होगी ताजपोशी?मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा होने के मद्देनजर उनके उत्तराधिकारी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस पद के लिए 1993 बैच के आईएएस अधिकारी वी. उमाशंकर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।वी. उमाशंकर वर्तमान में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सचिव हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। हरियाणा में प्रशासनिक अनुभव और मुख्यमंत्री कार्यालय के कामकाज की समझ के कारण उन्हें मुख्य सचिव पद के संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण पद पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली प्रशासनिक गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।सीएमओ में नए प्रधान सचिव की तलाश, कई नाम चर्चा मेंमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव रहे अरुण कुमार गुप्ता 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके बाद से इस पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय में नई जिम्मेदारी किस अधिकारी को मिलेगी, इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं।डॉ. राकेश गुप्ता का नाम प्रमुख दावेदारों में1997 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता वर्तमान में राष्ट्रपति सचिवालय में संयुक्त सचिव हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। शिक्षा सुधार, सुशासन और लिंगानुपात में सुधार से जुड़े अभियानों में उनकी भूमिका रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय में काम करने का पूर्व अनुभव उनके नाम को चर्चा में बनाए हुए है।
नितिन यादव के अनुभव पर भी नजर2000 बैच के आईएएस अधिकारी नितिन यादव केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हैं। वह चंडीगढ़ के गृह सचिव भी रह चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और केंद्र व राज्य स्तर पर कामकाज की जानकारी के चलते उनके नाम की भी चर्चा है।विकास गुप्ता की वापसी से खुल सकते हैं नए विकल्प2001 बैच के आईएएस अधिकारी विकास गुप्ता फिलहाल केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त हैं। हरियाणा में भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में वह परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं। उनकी वापसी होने की स्थिति में प्रदेश में वरिष्ठ पदों पर तैनाती के नए विकल्प बन सकते हैं।सीएमओ में पुराने चेहरों की वापसी के भी संकेत!मुख्यमंत्री कार्यालय में संभावित बदलावों के बीच उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल और सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के आयुक्त एवं सचिव केएम पांडुरंग की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। दोनों अधिकारियों को सीएमओ में दोबारा जिम्मेदारी मिलने की संभावनाओं पर प्रशासनिक हलकों में विचार-विमर्श की चर्चा है।यदि सरकार शीर्ष स्तर पर बदलाव करती है तो इसका असर केवल मुख्यमंत्री कार्यालय तक सीमित नहीं रह सकता। महत्वपूर्ण विभागों में कार्यभार का पुनर्वितरण और अधिकारियों की नई तैनाती भी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इन संभावनाओं पर अभी कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।केंद्र से चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को वापस बुलाने की पहलप्रदेश सरकार ने केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को हरियाणा वापस बुलाने के लिए डीओपीटी को पत्र लिखा है। इस सूची में वी. उमाशंकर, डॉ. राकेश गुप्ता, नितिन यादव और विकास गुप्ता के नाम बताए गए हैं। इन अधिकारियों की वापसी से प्रदेश सरकार को वरिष्ठ स्तर पर उपलब्ध प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिल सकता है। साथ ही, सीएमओ, मुख्य सचिवालय और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियों के पुनर्निर्धारण के विकल्प भी बढ़ सकते हैं। प्रशासनिक हलकों में इस कदम को अधिकारियों की कमी दूर करने और आगामी सेवानिवृत्तियों के मद्देनजर पहले से तैयारी करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।अक्टूबर से जनवरी तक कई अहम सेवानिवृत्तियांहरियाणा में अगले कुछ महीनों के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों का कार्यकाल पूरा होने वाला है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में नई तैनातियों की जरूरत बढ़ सकती है।फरीदाबाद मंडल के आयुक्त संजय जून 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। गृह, वित्त एवं विकास से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अभिलक्ष लिखी की सेवानिवृत्ति भी 30 नवंबर को निर्धारित है।वहीं, वित्तीय आयुक्त राजस्व (एफसीआर) तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा 31 जनवरी, 2027 को सेवानिवृत्त होंगी।इन सेवानिवृत्तियों के कारण वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर नई नियुक्तियों और विभागीय जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावनाएं बनी हुई हैं।47 आईएएस अधिकारियों की कमी, केंद्र में प्रतिनियुक्ति भी चुनौतीहरियाणा में आईएएस अधिकारियों की उपलब्धता प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। प्रदेश में कुल 226 पद स्वीकृत हैं, जबकि उपलब्ध अधिकारियों की संख्या 179 बताई जा रही है। इस प्रकार स्वीकृत संख्या के मुकाबले 47 अधिकारियों की कमी है।वरिष्ठता सूची के शीर्ष 20 अधिकारियों में से 10 के केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में चार वरिष्ठ अधिकारियों को वापस बुलाने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने से विभिन्न विभागों में कामकाज की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से बांटने में मदद मिल सकती है।बैंक धोखाधड़ी प्रकरण से भी प्रशासनिक हलकों में चर्चाआईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े कथित 645 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले ने भी हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में चर्चा पैदा की है। इस प्रकरण में कुछ अधिकारियों के नाम जांच और आरोपपत्रों के संदर्भ में सामने आने की खबरें हैं।उपलब्ध विवरणों के अनुसार, पंकज अग्रवाल, आरके सिंह और प्रदीप कुमार न्यायिक हिरासत में हैं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों विनीत गर्ग, मोहम्मद शाईन और डॉ. साकेत कुमार के नाम भी इस मामले के संदर्भ में सामने आए हैं। संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना है।इस प्रकरण और प्रस्तावित प्रशासनिक फेरबदल के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।अब सरकार के अगले फैसले पर टिकी नजरेंहरियाणा में शीर्ष प्रशासनिक पदों पर संभावित बदलाव कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव की नियुक्ति होनी है, वहीं दूसरी ओर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के कार्यकाल की समाप्ति नजदीक है। इसके साथ ही केंद्र से वरिष्ठ अधिकारियों की वापसी और आने वाले महीनों में होने वाली सेवानिवृत्तियां भी प्रशासनिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार सीएमओ में किस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपती है, मुख्य सचिव पद के लिए किस नाम पर सहमति बनती है और केंद्र से अधिकारियों की वापसी की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। इन फैसलों से हरियाणा की प्रशासनिक टीम की भावी संरचना स्पष्ट होगी।
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