
करवा चौथ पर पूजा की तैयारी में महिलाएं कपड़ों और श्रृंगार के साथ पूजन सामग्री का भी खास ध्यान रखती हैं। इस दिन पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को माता करवा की पूजा होती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करवा और कलश का खास स्थान है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि करवे में जल के साथ सिक्का, चावल या सुपारी डालनी चाहिए या नहीं।
करवे में सिर्फ जल रखें या दूसरी चीजें भी डालें?
करवा चौथ की पूजा में साफ जल का विशेष महत्व है। इसके अलावा कुछ परिवारों में परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री भी रखी जाती है। जरूरी नहीं कि सभी वस्तुओं को कलश के पानी में ही डाला जाए। कई चीजें पूजा की थाली में अलग रखकर भी अर्पित की जा सकती हैं।
1. जल: करवे या कलश में स्वच्छ जल भरकर रखें। कई घरों में इसी जल से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसलिए पानी और बर्तन दोनों साफ होने चाहिए।
2. सिक्का: कुछ परिवार करवे में सिक्का डालते हैं। इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अगर यह आपके घर की परंपरा है, तो सिक्के को साफ करके इस्तेमाल करें। चाहें तो इसे थाली में अलग भी रख सकती हैं।
3. अक्षत: अक्षत यानी साबुत चावल का इस्तेमाल पूजा में तिलक लगाने और अर्पण के लिए किया जाता है। कुछ परंपराओं में इसे कलश की सामग्री में शामिल किया जाता है, जबकि कई जगह इसे अलग रखा जाता है।
4. सुपारी: सुपारी कई धार्मिक पूजाओं में इस्तेमाल होती है। करवा चौथ पर भी कुछ परिवार इसे पूजन सामग्री में रखते हैं। इसे पानी में डालना जरूरी नहीं है; पूजा की थाली में अलग रखना भी एक विकल्प है।
करवा और अर्घ्य के लोटे का इस्तेमाल कैसे होता है?
करवा चौथ की पूजा में मिट्टी या धातु का करवा मुख्य पूजन सामग्री का हिस्सा होता है। कई जगहों पर करवे में जल के अलावा गेहूं के दाने, खील या बताशे रखने की परंपरा भी है। यह व्यवस्था परिवार और क्षेत्र की रीति के अनुसार अलग हो सकती है।
दूसरी ओर, अर्घ्य देने के लिए अलग लोटा इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आमतौर पर तांबे, पीतल या चांदी का होता है और इसमें साफ जल रखा जाता है। रात में चंद्रमा दिखाई देने पर इसी जल से अर्घ्य दिया जाता है। पूजा से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि सभी बर्तन साफ हों और सामग्री व्यवस्थित रखी गई हो।
करवा चौथ पर करवे को क्यों माना जाता है शुभ?
करवा चौथ की पूजा में करवा या कलश को मंगलकामना और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। कुछ परिवारों में करवे को दूसरी सुहागिन महिलाओं के साथ बदलने या उसका आदान-प्रदान करने की रस्म भी निभाई जाती है।
ध्यान रखें कि करवे में रखी जाने वाली सामग्री और पूजा का तरीका हर जगह एक जैसा नहीं होता। इसलिए किसी भी सामग्री को अनिवार्य मानने के बजाय अपने घर की परंपरा के अनुसार पूजा करें। सिक्का, अक्षत और सुपारी को जरूरत के मुताबिक अलग थाली में रखकर भी अर्पित किया जा सकता है।



